सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी: यूनिटेक परियोजनाओं में देरी या आदेशों की अवहेलना पर राज्य प्राधिकरणों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिटेक लिमिटेड की अधूरी आवासीय परियोजनाओं के संबंध में अपने पिछले आदेशों का पालन न करने को लेकर राज्य विकास प्राधिकरणों को सख्त चेतावनी दी। अदालत ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग जैसे प्राधिकरणों को निर्देश दिया कि वे आवश्यक अनुमतियाँ शीघ्रता से प्रदान करें और परियोजनाओं की राह में कोई रोड़ा न बनें।

न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा, “यदि यह पाया गया कि राज्य प्राधिकरणों ने इस न्यायालय के पूर्व आदेशों का पालन नहीं किया है, तो हम इसे बहुत गंभीरता से लेंगे। हम यह भी सहन नहीं करेंगे कि कोई इन परियोजनाओं की प्रगति में बाधा उत्पन्न करे।”

पीठ ने स्पष्ट किया कि वह इस समय केवल सभी संबंधित आवेदनों की प्राथमिकता तय कर रही है और सभी शिकायतों का शीघ्र समाधान किया जाएगा। न्यायमूर्ति परदीवाला ने घर खरीदारों की ओर से पेश अधिवक्ता आर.सी. लाहोटी से कहा, “इस अदालत में अब कम सुनवाई और ज़्यादा आदेश होंगे, ताकि चीज़ें फिर से आगे बढ़ सकें।”

READ ALSO  दिल्ली हाई कोर्ट ने विरासत वृक्षों को नुकसान पहुंचाने पर अवमानना याचिका पर शहर के अधिकारियों से जवाब मांगा

नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र कुमार से पीठ ने कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि यूनिटेक बोर्ड को बिना उपयोग किए गए फ्लैट्स की बिक्री की अनुमति दी जाए ताकि अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए धन जुटाया जा सके। पीठ ने कहा, “हम आपको चेतावनी दे रहे हैं कि पिछले आदेशों का पूरी तरह पालन होना चाहिए।”

16 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक की विभिन्न परियोजनाओं को रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (RERA) के तहत पंजीकरण से छूट दी थी, जिससे घर खरीदारों को रुके हुए ऋणों की अदायगी में राहत मिली। अदालत ने कहा था कि यह आदेश न्यायहित में है और घर खरीदारों को ऋण जारी करने की प्रक्रिया सरल बनाएगा।

रेरा कानून के अनुसार, 500 वर्ग मीटर से अधिक या 8 से अधिक फ्लैटों वाली परियोजनाओं को पंजीकरण अनिवार्य होता है। परंतु न्यायालय ने इसे औपचारिकता मानते हुए छूट प्रदान की ताकि खरीदारों को राहत मिल सके।

अदालत ने उन बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी नोटिस जारी किया था, जिन्होंने निर्माण में देरी के कारण खरीदारों के ऋण खातों को एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) घोषित कर दिया था। वर्तमान में यूनिटेक का प्रबंधन केंद्र द्वारा नियुक्त निदेशक मंडल के अधीन है, जिसने इन ऋणों की दोबारा अदायगी के लिए दिशा-निर्देश मांगे थे।

याचिका में कहा गया कि चूंकि परियोजनाएं अब फिर से शुरू हो रही हैं, इसलिए बैंकों को खरीदारों को उनका शेष ऋण जारी करने का निर्देश दिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया था कि यूनिटेक की नोएडा स्थित परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान की जाए। इसके साथ ही नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को तीन परियोजनाओं को मंजूरी देने का निर्देश भी दिया गया था। यदि कोई मुद्दा शेष रह जाए, तो वह न्यायमूर्ति ए.एम. सप्रे की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष उठाया जाए।

READ ALSO  जीवन हित और प्रेम एवं स्नेह के साथ दिया गया उपहार निपटान विलेख के रूप में मान्य, इसे एकतरफा रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

22 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक के केंद्र-नियुक्त निदेशक मंडल को यह अनुमति दी थी कि वे संपत्तियों पर बाहरी हस्तक्षेप या अवरोधों से निपटने के लिए पुलिस सहायता ले सकें।

20 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक लिमिटेड का संपूर्ण प्रबंधन नियंत्रण केंद्र सरकार को सौंप दिया था। नए बोर्ड को घर खरीदारों से बकाया राशि वसूलने, बिना बिके फ्लैट्स को बेचने और अघोषित संपत्तियों का मुद्रीकरण करने की अनुमति दी गई थी।

READ ALSO  दिल्ली हाईकोर्ट ने खेत बचाने के लिए हत्या के दोषी की पैरोल चार सप्ताह बढ़ाई

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी और इसकी सहयोगी संस्थाओं का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया था। ग्रांट थॉर्नटन इंडिया के समीर परांजपे की रिपोर्ट में बताया गया था कि 2006 से 2014 के बीच यूनिटेक ने 29,800 घर खरीदारों से करीब ₹14,270 करोड़ और 6 वित्तीय संस्थानों से ₹1,805 करोड़ एकत्र किए थे। इसमें से ₹5,063 करोड़ घर खरीदारों का और ₹763 करोड़ संस्थागत राशि का दुरुपयोग हुआ, जिसमें 2007 से 2010 के बीच टैक्स हैवन देशों में उच्च मूल्य निवेश किए गए।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles