भगीरथपुरा जल संकट: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दस्तावेजों की सुरक्षा के निर्देश दिए, मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में वर्चुअल हाजिरी का आदेश

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल संकट से जुड़ी मूल फाइलों और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। इसमें जल पाइपलाइन बिछाने से संबंधित टेंडर दस्तावेज और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट भी शामिल हैं।

मुख्य न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने मंगलवार को इस मामले से जुड़ी कई जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

“कलेक्टर, इंदौर और आयुक्त, नगर निगम यह सुनिश्चित करें कि भगीरथपुरा में पेयजल लाइन बिछाने के टेंडर से संबंधित रिकॉर्ड और नमूनों की रिपोर्ट सहित सभी जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं,” कोर्ट ने आदेश में कहा।

यह निर्देश तब आया जब याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आशंका जताई कि मूल दस्तावेजों से छेड़छाड़ की जा सकती है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को 6 जनवरी को दिए गए अपने अंतरिम आदेशों का पालन जारी रखने और एक नई प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया। इन अंतरिम आदेशों में अदालत ने प्रशासन को कई तात्कालिक कदम उठाने को कहा था, जैसे:

  • डायरिया से पीड़ितों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना
  • लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना
  • दूषित जल स्रोतों के उपयोग को रोकना
  • जल परीक्षण व संक्रमण रोकथाम व्यवस्था को मजबूत करना
  • जल आपूर्ति ढांचे का उन्नयन
  • दीर्घकालिक जल सुरक्षा योजना लागू करना
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कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 27 जनवरी की तारीख तय की है और राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन को उस दिन भी वीडियो लिंक के माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। जैन पहले भी तीन बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई में शामिल हो चुके हैं।

राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है जो जल प्रदूषण के कारणों की जांच, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के सुझाव देगी।

लेकिन याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आरोप लगाया कि यह समिति महज़ दिखावा है और इसका उद्देश्य उच्च अधिकारियों को बचाना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम अदालत के अंतरिम आदेशों का समुचित पालन नहीं कर रहे हैं। राज्य सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बनने वाली निगरानी समिति के लिए स्वतंत्र सदस्यों के नाम सुझाएं ताकि अंतरिम आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके। इस पर वकीलों ने समय मांगा।

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स्थानीय निवासियों के अनुसार, दिसंबर के अंत से अब तक उल्टी-दस्त से 25 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, राज्य सरकार द्वारा 15 जनवरी को कोर्ट में जमा की गई रिपोर्ट में 7 मौतों की पुष्टि की गई है। महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की डेथ ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, भगीरथपुरा में 15 मौतें दूषित जल आपूर्ति से जुड़ी हो सकती हैं।

अधिकारियों के अनुसार, भगीरथपुरा के 51 ट्यूबवेलों में जल परीक्षण के दौरान ई. कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई। बताया गया कि शौचालय के गंदे पानी के पाइप से पेयजल पाइपलाइन में मिलावट हो गई, जिससे यह गंभीर जलजनित संक्रमण फैला।

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इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में जलजनित रोगों के कारण कई लोगों की मौत और सैकड़ों लोग बीमार हो चुके हैं। देश के ‘साफ़-सुथरे शहर’ की छवि वाले इंदौर में इस तरह की त्रासदी के बाद व्यापक जन आक्रोश सामने आया। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए गंभीर रुख अपनाया है और कई जनहित याचिकाओं पर सक्रियता से सुनवाई कर रहा है।

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