इंदौर जल प्रदूषण कांड: E. coli संक्रमण से हुई मौतें, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक जांच की मांग पर आदेश सुरक्षित रखा

मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को हाईकोर्ट को बताया कि इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में पीने के पानी में E. coli बैक्टीरिया की मौजूदगी के कारण डायरिया और उल्टी का गंभीर प्रकोप फैला, जिससे कई लोगों की मौत हो गई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस त्रासदी की न्यायिक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर FIR की मांग वाली याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ को बताया कि भगीरथपुरा क्षेत्र के 51 ट्यूबवेलों के पानी में E. coli बैक्टीरिया पाया गया। उन्होंने कहा कि यही जल प्रदूषण इस संक्रमण और व्यापक बीमारी का मुख्य कारण है।

चिकित्सकों के अनुसार, E. coli आमतौर पर गंदे नाले या मल-मूत्र से पानी में आता है और इससे उल्टी, दस्त, पेट दर्द व बुखार जैसे लक्षण पैदा होते हैं।

कोर्ट के सवालों के जवाब में सरकारी वकील ने बताया कि इलाके की एक पानी की पाइपलाइन में रिसाव होने के कारण सीवेज पानी पीने के पानी में मिल गया। इस प्रदूषण का स्रोत पास के एक सार्वजनिक शौचालय की सीवर लाइन भी है। सरकार ने बताया कि इलाके में सर्वे और पानी के नमूनों की जांच अब भी जारी है।

कोर्ट इस मामले में दायर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें न्यायिक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अजय बगड़िया ने सरकार की ओर से गठित जांच समिति पर अविश्वास जताया। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला की अध्यक्षता वाली समिति इस त्रासदी की सच्चाई छिपाने के लिए बनाई गई है। उन्होंने हाईकोर्ट से निवेदन किया कि किसी सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया और अगली सुनवाई के लिए 28 जनवरी की तारीख तय की है।

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सरकारी स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, 15 जनवरी तक सात लोगों की मौत की पुष्टि की गई थी, जिनमें एक पांच महीने का शिशु भी शामिल था। वहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है।

महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज द्वारा तैयार की गई ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट के अनुसार, 15 मौतों का संबंध किसी न किसी रूप में इस जल संकट से जुड़ा हो सकता है। प्रशासन ने अब तक 21 मृतकों के परिवारों को ₹2 लाख की सहायता राशि दी है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि कुछ मौतें अन्य कारणों से हुई थीं, लेकिन मानवीय आधार पर सभी परिवारों को सहायता दी गई है।

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