सुप्रीम कोर्ट ने अंबिएंस मॉल निर्माण मामले में CBI जांच रद्द की, पर्यावरणीय जुर्माने पर भी रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुरुग्राम स्थित अंबिएंस मॉल के निर्माण को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का जुलाई 2020 का आदेश “कानून के अनुरूप नहीं” था और उस आधार पर आपराधिक जांच जारी नहीं रह सकती।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह भी साफ किया कि हाईकोर्ट में भूमि उपयोग, लाइसेंसिंग में अनियमितताओं और खरीदारों से जुड़े अन्य मुद्दों पर लंबित कार्यवाही इस फैसले से प्रभावित नहीं होगी।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा परियोजना डेवलपर पर लगाए गए ₹10 करोड़ के पर्यावरणीय मुआवज़े के आदेश पर भी अस्थायी रोक लगा दी है, लेकिन कहा कि यह मामला भविष्य में फिर से उठाया जा सकता है, इस फैसले के नतीजों के आधार पर।

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यह विवाद दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित गुरुग्राम के नाथूपुर गांव की लगभग 19 एकड़ जमीन को लेकर है, जिसे 1990 के दशक की शुरुआत में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए लाइसेंस मिला था। लेकिन बाद में इसका बड़ा हिस्सा वाणिज्यिक उपयोग के लिए डीलाइसेंस कर दिया गया, जिससे नाराज़ होकर कई फ्लैट खरीदार और निवासी अदालत पहुंचे।

2015 में इस मुद्दे पर जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि सरकारी अधिकारियों और बिल्डर ने मिलीभगत कर नियमों का उल्लंघन किया और जमीन के व्यावसायिक दोहन की अनुमति दी।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जुलाई 2020 में:

  • अंबिएंस मॉल निर्माण में CBI जांच के आदेश दिए थे
  • मॉल और उससे जुड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लाइसेंस रद्द कर दिए
  • पाया कि हाउसिंग प्रोजेक्ट की भूमि को 18.98 एकड़ से घटाकर 7.9 एकड़ कर दिया गया था, जो कानून व खरीदारों के साथ धोखा था
  • यह भी माना कि लाइसेंस जारी करते समय अनिवार्य लेआउट प्लान रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं था
  • पूरी प्रक्रिया को “धोखाधड़ीपूर्ण कवायद” करार देते हुए कहा था कि बिल्डर और अधिकारियों के बीच पूर्व नियोजित समझ बनी हुई थी जिससे बिल्डर को अनुचित लाभ हुआ
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हाईकोर्ट ने CBI को छह महीने में जांच पूरी करने के आदेश दिए थे और राज्य सरकार से आगे की कार्यवाही करने को कहा था।

अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश को क़ानूनी रूप से अस्थिर मानते हुए निरस्त कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस फैसले से हाईकोर्ट में भूमि उपयोग और अन्य नागरिक मुद्दों पर जारी सुनवाई प्रभावित नहीं होगी।

अदालत ने पर्यावरणीय नुकसान के लिए NGT द्वारा लगाए गए ₹10 करोड़ के जुर्माने पर भी स्टे लगा दिया है, लेकिन संकेत दिया कि यह मामला भविष्य में फिर से खोला जा सकता है, इस फैसले की कानूनी व्याख्या के आधार पर।

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अंबिएंस लैगून हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के निवासी लंबे समय से इस मुद्दे पर आवाज़ उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि जो जमीन सामुदायिक सुविधाओं और ओपन स्पेस के लिए आरक्षित थी, उसे बिना जानकारी और सहमति के व्यावसायिक उपयोग में लाया गया।

अब जबकि CBI जांच बंद हो गई है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ज़मीन के उपयोग, पर्यावरणीय प्रभाव और खरीदारों के अधिकारों से जुड़े अन्य कानूनी मुद्दे अदालतों में जारी रहेंगे।

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