AIIMS बनाएगा 3000 बेड का विश्राम सदन, दिल्ली हाईकोर्ट ने की सराहना; ठंड में मरीजों के परिजनों को मिलेगी राहत

AIIMS ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया कि उसने मरीजों के परिजनों के लिए करीब 80 रैन बसेरे बनाने के उद्देश्य से दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) को ज़मीन उपलब्ध कराई है और साथ ही 3,000 बिस्तरों वाला एक विश्राम सदन भी निर्मित किया जाएगा।

मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ एक सुओ मोटो जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो AIIMS के बाहर इलाज का इंतजार कर रहे मरीजों और उनके परिजनों की “दयनीय स्थिति” पर प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है।

AIIMS की ओर से पेश अधिवक्ता सत्य रंजन स्वैन ने अदालत को बताया कि वर्तमान में तीन आश्रय स्थलों में कुल 949 बिस्तर उपलब्ध हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के तौर पर अंसारी नगर वेस्ट में दो एकड़ ज़मीन पर 3,000 बेड का विश्राम सदन बनाने की योजना है। इस परियोजना को अहमदाबाद की एक एनजीओ के सहयोग से क्रियान्वित किया जाएगा।

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AIIMS ने अपने “रोगी-केंद्रित” और मानवीय दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि उसका प्रयास है कि “कोई भी परिजन इस ठंड में खुले में न सोए” और सभी को सम्मानजनक आश्रय मिले।

पीठ ने इस योजना की सराहना करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से विश्राम सदन के लिए आर्थिक सहयोग की अपील की। मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने कहा, “बार के सदस्यों को सक्रिय करें ताकि कुछ फंड इकट्ठा कर AIIMS को दान दिया जा सके।” उन्होंने पंजाब में आई बाढ़ के समय बार द्वारा दिए गए दान का उल्लेख भी किया।

कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों से विश्राम सदन के निर्माण में सहयोग करने का निर्देश देते हुए आशा जताई कि यह सुविधा “कम से कम समय में” तैयार हो जाएगी।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बताया कि अदालत के निर्देश के बाद सभी संबंधित एजेंसियों की बैठक हुई और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए कि “ठंड में किसी एक व्यक्ति को भी तकलीफ न हो।”

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DUSIB के वकील ने बताया कि AIIMS और सफदरजंग के पास 20 नए पैगोडा टाइप रैन बसेरे लगाए गए हैं और और अधिक शाम तक स्थापित कर दिए जाएंगे। साथ ही RML और लेडी हार्डिंग अस्पताल के पास 20-20 टेंट भी लगाए गए हैं।

दिल्ली पुलिस की ओर से बताया गया कि 24×7 निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। NDMC के वकील ने बताया कि पानी और मोबाइल टॉयलेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
साउथ जिला सत्र न्यायाधीश की रिपोर्ट के अनुसार, जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए गए और जहां जगह उपलब्ध थी वहां टेंट लगाए गए।

कोर्ट ने इन संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, “हमें लगता है कि पिछले दो दिनों में स्थिति में सुधार हुआ है” और “सभी एजेंसियां पूरी ईमानदारी से कार्य कर रही हैं।”

पीठ ने संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश देते हुए 24 जनवरी को साउथ जिले के प्रधान जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में अगली समन्वय बैठक करने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।

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यह जनहित मामला 12 जनवरी को उस वक्त उठाया गया जब हाईकोर्ट ने एक समाचार रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया जिसमें बताया गया था कि AIIMS के बाहर मरीजों के परिजन सर्दी में खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं।

उस दिन न्यायमूर्ति सी हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने कहा था कि यह मुद्दा “तत्काल कार्यपालिका और न्यायिक हस्तक्षेप” की मांग करता है।

पिछली सुनवाई में भी अदालत ने DUSIB, AIIMS, RML जैसे संस्थानों के उच्चाधिकारियों की बैठक बुलाकर तात्कालिक योजना बनाने और उसी दिन उसे लागू करने का निर्देश दिया था।

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