बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश: शापूरजी पल्लोनजी को लौटाई जाएगी जमा राशि, ब्याज का आधा हिस्सा शहीद सैनिकों के परिजनों के कल्याण को मिलेगा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आदेश दिया है कि वह उसके द्वारा अदालत में जमा कराई गई ₹46.5 करोड़ की राशि पर अर्जित ब्याज का 50% हिस्सा Armed Forces Battle Casualties Welfare Fund को स्थानांतरित करे। कोर्ट ने कहा कि देश के लिए जान गंवाने वाले सैनिकों के परिवारों को सहायता देना एक “अत्यंत आवश्यक और तात्कालिक आवश्यकता” है।

न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति आर.आर. भोसले की पीठ ने यह आदेश 23 दिसंबर 2025 को सुनाया, जब उन्होंने ED की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें Prevention of Money Laundering Act (PMLA) की अपीलीय अधिकरण (Tribunal) के 2019 के आदेश को चुनौती दी गई थी। उस आदेश में शापूरजी पल्लोनजी एंड कंपनी लिमिटेड (SPCL) की ₹141.5 करोड़ की संपत्ति की कुर्की को रद्द कर दिया गया था।

ED ने आरोप लगाया था कि SPCL द्वारा निलेश ठाकुर और उसकी कंपनियों को वर्ष 2005 से भुगतान किए गए पैसे, मनी लॉन्ड्रिंग के तहत “अपराध की आय” (proceeds of crime) थे। SPCL ने ये भुगतान अलीबाग और पेन में 900 एकड़ जमीन खरीदने के समझौते के तहत किए थे, जिसकी दर ₹30 लाख प्रति एकड़ थी।

SPCL ने ED की कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि ये भुगतान वैध भूमि समझौते के तहत अग्रिम रूप में किए गए थे, और इनका उल्लेख कंपनी के इनकम टैक्स रिकॉर्ड में भी है। कंपनी ने यह भी कहा कि निलेश ठाकुर उस समय करीब चार साल से अनधिकृत अवकाश (unsanctioned leave) पर था और कोई सार्वजनिक कर्तव्य नहीं निभा रहा था।

जनवरी 2019 में, मनी लॉन्ड्रिंग ट्रिब्यूनल ने SPCL के पक्ष में निर्णय दिया और कुर्क की गई संपत्ति को मुक्त करने का आदेश दिया। इसके विरुद्ध ED ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की थी, जहां अंतरिम राहत के रूप में कोर्ट ने SPCL से संबंधित ₹46.5 करोड़ कोर्ट में जमा करवाए थे।

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अंततः हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखते हुए ED की अपील को खारिज कर दिया और ₹46.5 करोड़ की जमा राशि SPCL को लौटाने का निर्देश दिया। साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि इस राशि पर अब तक जो ब्याज जमा हुआ है, उसका 50% हिस्सा Armed Forces Battle Casualties Welfare Fund को दिया जाए।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा:

“सीमा पर और युद्धभूमि में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं और परिवारों को सहायता प्रदान करना एक तात्कालिक और गंभीर आवश्यकता है।”

न्यायालय ने आगे टिप्पणी की:

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“हम सैनिकों के बलिदान और उनके परिजनों द्वारा झेली जा रही कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय ले रहे हैं। हम इसे ‘बैलेंसिंग ऑफ इक्विटीज’ के सिद्धांत के तहत उचित मानते हैं।”

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