शब्बीर शाह ने सुप्रीम कोर्ट से कहा— ‘मैंने पांच प्रधानमंत्रियों से कश्मीर मुद्दे पर बात की’; टेरर फंडिंग मामले में जमानत की मांग

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उन्होंने कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत के पांच प्रधानमंत्रियों से मुलाकात की थी और उनके भाषण कश्मीर के लोगों की भावनाओं को ही अभिव्यक्त करते थे।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ शब्बीर शाह की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने उन्हें टेरर फंडिंग मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था। शाह 2019 से हिरासत में हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्विस ने शाह की ओर से दलील देते हुए कहा, “मैंने कभी पत्थर नहीं चलाया, न ही किसी को उकसाया। मैं कश्मीर मुद्दे पर पांच प्रधानमंत्रियों के साथ बैठा हूं। उनके पास इसकी तस्वीरें हैं। उन्होंने मुझे बुलाया क्योंकि वे जानते थे कि मैं आतंकवादी नहीं हूं।”

गोंसाल्विस ने आगे कहा कि शाह के भाषण कश्मीर के लोगों की पीड़ा को दर्शाते थे। “हां, उनके शब्द कुछ लोगों को असहज कर सकते थे, लेकिन वे हिंसक नहीं थे। वह पाकिस्तान के पक्ष में कभी नहीं बोले। उन्होंने हमेशा शांति की बात की।”

उन्होंने कोर्ट को बताया कि शाह ने पूर्व प्रधानमंत्रियों वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर, आई.के. गुजराल के अलावा राम जेठमलानी और के.सी. पंत जैसे नेताओं से भी मुलाकात की थी।

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जस्टिस मेहता ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में अदालत की हमदर्दी नहीं होती, लेकिन हिरासत को उचित ठहराने के लिए ठोस तथ्यों की जरूरत होती है।

“Prima facie हमें ऐसे लोगों से सहानुभूति नहीं है, लेकिन हमें आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकते। छह साल से ज्यादा हिरासत का क्या आधार है?” पीठ ने NIA से पूछा।

NIA की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने समय की मांग की, यह कहते हुए कि जरूरी दस्तावेजों का कुछ हिस्सा प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस के पास हो सकता है।

शाह को 4 जून 2019 को NIA ने गिरफ्तार किया था। 2017 में NIA ने एक एफआईआर में 12 लोगों को नामजद किया था, जिसमें पत्थरबाज़ी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश जैसे आरोप लगाए गए थे।

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NIA का आरोप है कि शाह ने आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए हवाला से पैसे प्राप्त किए, सीमापार व्यापार के जरिए धन जुटाया और शहीद घोषित कर आतंकी परिवारों को सम्मानित किया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2023 में जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि शाह के खिलाफ 24 आपराधिक मामले लंबित हैं और उनके फिर से ‘उन्हीं गतिविधियों’ में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

गोंसाल्विस ने दलील दी कि शाह की उम्र 74 वर्ष है और यदि उन्हें जमानत दी जाए, तो वह केवल अपने घर और बगीचे तक ही सीमित रहेंगे। “अब कश्मीर में भाषणों का दौर खत्म हो चुका है,” उन्होंने कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि 10 फरवरी को सुनवाई पूरी नहीं होती, तो उसी दिन राहत देने पर विचार किया जा सकता है।

  • शब्बीर शाह को टेरर फंडिंग मामले में 2019 से हिरासत में रखा गया है।
  • आरोप है कि उन्होंने लोगों को अलगाववाद के लिए उकसाया, आतंकियों की शहादत का महिमामंडन किया और अवैध फंडिंग की।
  • हाईकोर्ट ने कहा था कि शाह गैरकानूनी संगठन ‘जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी’ के प्रमुख हैं और गंभीर आरोपों के मद्देनज़र उन्हें रिहा नहीं किया जा सकता।
    10 फरवरी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकती है कि शाह को जमानत या कोई वैकल्पिक राहत दी जाए या नहीं।

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