सुप्रीम कोर्ट ने जत्थेदार हवारा की पंजाब जेल स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाली

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जत्थेदार जगतार सिंह हवारा की उस याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी जिसमें उन्होंने दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी भी जेल में स्थानांतरण की मांग की है।

पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हवारा की याचिका पर सुनवाई जस्टिस एम एम सुंद्रेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ के समक्ष होनी थी, लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अनुपस्थिति के कारण इसे स्थगित कर दिया गया।

याचिका में हवारा ने कहा है कि वह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के निवासी हैं और उनके खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोई मामला लंबित नहीं है। ऐसे में उन्हें तिहाड़ जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी जेल में अब तक की आचरण पत्रिका निष्कलंक रही है, सिवाय वर्ष 2004 में हुई एक कथित जेलब्रेक के जिसमें वह फरार हो गए थे और बाद में गिरफ्तार किए गए।

“जिस आधार पर उन्हें पहले हाई-रिस्क कैदी घोषित किया गया था, वह अब मौजूदा हालात में प्रासंगिक नहीं है,” याचिका में कहा गया। हवारा ने यह भी बताया कि उनकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है, उनकी मां अमेरिका में कोमा में हैं और उनकी बेटी पंजाब में रहती है।

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हवारा को मार्च 2007 में निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2010 में उनकी सजा को उम्रकैद में बदलते हुए यह स्पष्ट किया कि उन्हें शेष जीवन जेल में बिताना होगा।

हवारा की याचिका में कहा गया है कि इस फैसले के खिलाफ उन्होंने और अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की हुई है, जो अब भी लंबित है।

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पिछले साल 27 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने हवारा की याचिका पर केंद्र, दिल्ली और पंजाब सरकार, और चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी किया था।

याचिका में हवारा ने यह भी दावा किया है कि बेअंत सिंह की हत्या के बाद उनके खिलाफ 36 झूठे मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से सभी में उन्हें बरी कर दिया गया है सिवाय एक मामले के। साथ ही, उसी केस में सजा पाए एक अन्य आरोपी को पहले ही तिहाड़ जेल से चंडीगढ़ की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है।

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अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई दो हफ्ते बाद करेगा।

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