इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर के वज़ुखाना क्षेत्र का पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI Survey) कराने संबंधी याचिका पर सुनवाई 3 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि मामला इस समय सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
यह दीवानी पुनरीक्षण याचिका रक्षी सिंह द्वारा दाखिल की गई थी, जो श्रृंगार गौरी पूजा से जुड़ी मुख्य वादकारिणी में से एक हैं। रक्षी सिंह ने वाराणसी जिला न्यायाधीश के 21 अक्टूबर 2023 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें ASI को ज्ञानवापी परिसर के वज़ुखाना क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया गया था।
याचिका में मांग की गई है कि वज़ुखाना क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए—लेकिन उस संरचना को छोड़कर, जिसे हिंदू पक्ष ‘शिवलिंग’ और मुस्लिम पक्ष ‘फव्वारा’ बता रहा है।
याचिकाकर्ता रक्षी सिंह का कहना है कि इस तरह का सर्वे न्याय के हित में होगा और इससे न सिर्फ वादी-पक्ष बल्कि प्रतिवादी-पक्ष को भी लाभ मिलेगा। इसके जरिए अदालत को विवाद के निपटारे में मदद मिल सकेगी।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि संबंधित मुद्दा फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और शीर्ष अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 27 जनवरी तय की है। इसके मद्देनज़र हाईकोर्ट ने याचिका पर अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय कर दी।
ज्ञानवापी विवाद उस दीवानी वाद से जुड़ा है जिसमें कुछ हिंदू महिलाओं ने वाराणसी स्थित श्रृंगार गौरी स्थल पर नियमित पूजा की अनुमति मांगी है। यह स्थल ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में आता है। 2022 में कोर्ट द्वारा कराए गए वीडियो सर्वे में वज़ुखाना क्षेत्र में एक संरचना पाई गई थी, जिसे हिंदू पक्ष शिवलिंग बता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष उसे फव्वारा बता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल इस पूरे मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाएं लंबित हैं, जिनमें दीवानी वाद की पोषणीयता और सबूतों की वैधता को लेकर बहस जारी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई टालने का निर्णय यह दिखाता है कि इस संवेदनशील मामले में कई स्तरों पर कानूनी प्रक्रिया जारी है, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा की जा रही है।

