सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश: मुंबई कोस्टल रोड पर पुनः प्राप्त भूमि पर न हो व्यावसायिक या आवासीय विकास, जनता के लिए खुली रहे ज़मीन

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि मुंबई कोस्टल रोड (दक्षिण) परियोजना के तहत समुद्र से पुनः प्राप्त की गई भूमि जनता के लिए खुली रहनी चाहिए और इस पर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक या आवासीय विकास न वर्तमान में किया जा सकता है, न भविष्य में किया जाएगा।

न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने यह टिप्पणी उस जनहित याचिका (PIL) को निपटाते हुए की, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस ज़मीन पर हरित क्षेत्र विकसित करने और लंबे समय तक रखरखाव के लिए नियुक्त किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी।

यह जनहित याचिका जिपनेश नरेंद्र जैन ने दाखिल की थी, जिसमें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा 19 दिसंबर 2024 को जारी ‘इंप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EoI) को चुनौती दी गई थी। इस EoI के ज़रिए BMC ने कोस्टल रोड के तहत पुनः प्राप्त भूमि पर हरियाली, उद्यान और प्रॉमेनेड विकसित करने और उसका रखरखाव करने के लिए निजी एजेंसियों को आमंत्रित किया था।

याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड या रिलायंस फाउंडेशन को ‘स्वयंसेवी एजेंसी’ नियुक्त किए जाने के किसी भी निर्णय को रद्द करने की मांग की थी।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने 30 सितंबर 2022 को ही इस मुद्दे पर आवश्यक निर्देश दे दिए थे और उसी आदेश के तहत पहले ही यह स्पष्ट किया जा चुका है कि इस भूमि का आवासीय या व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता।

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पीठ ने दोहराया:

“पुनः प्राप्त भूमि का उपयोग किसी भी प्रकार के आवासीय या व्यावसायिक विकास/उद्देश्यों के लिए न वर्तमान में किया जा सकता है और न भविष्य में।”

अदालत ने यह भी कहा कि हालांकि कुछ विशेष स्थानों पर रखरखाव या विकास कार्यों की आवश्यकता हो सकती है, फिर भी पूरी भूमि को सामान्यतः जनता के लिए खुला रखा जाना चाहिए।

“धर्मवीर स्वराज्यरक्षक छत्रपति संभाजी महाराज मुंबई कोस्टल रोड (दक्षिण) सामान्यतः जनता के लिए खुला रहेगा, सिवाय उन स्थानों के जहां कुछ अतिरिक्त विकास या भविष्य में रखरखाव की आवश्यकता हो।”

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BMC द्वारा विकसित की जा रही यह कोस्टल रोड परियोजना मुंबई की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा योजनाओं में से एक है, जिसके तहत समुद्र से विशाल भूमि पुनः प्राप्त की गई है। BMC ने इस ज़मीन पर सौंदर्यीकरण और रखरखाव के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत निजी संस्थाओं की भागीदारी आमंत्रित की थी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से इन कार्यों में रुचि जताई गई थी, लेकिन इससे संबंधित संभावित निजीकरण और व्यावसायिक लाभ की आशंका को लेकर आपत्तियां सामने आईं।

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अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए पुनः यह सुनिश्चित किया कि पुनः प्राप्त की गई भूमि का प्रयोग केवल सार्वजनिक हित में किया जाएगा और किसी भी प्रकार के निजी या व्यावसायिक लाभ के लिए इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता।

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