जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हुई गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सोमवार को हुई सुनवाई में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो ने अदालत को बताया कि जिला मजिस्ट्रेट ने बिना उचित विचार किए और असंगत सामग्री के आधार पर उनके पति को हिरासत में लिया।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की, जहां वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आंगमो की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि हिरासत के आदेश में पुलिस की सिफारिशों को बस “कॉपी-पेस्ट” किया गया है और निर्णय में स्वतंत्र विवेक का इस्तेमाल नहीं हुआ। मामला अब 13 जनवरी को फिर से सुना जाएगा।
सिब्बल ने दलील दी कि हिरासत के जिन चार वीडियो का उल्लेख किया गया, उन्हें वांगचुक को कभी उपलब्ध ही नहीं कराया गया, जिससे उन्हें प्रभावी प्रतिवेदन देने का मौका नहीं मिला। “यह उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। जिला मजिस्ट्रेट ने सिर्फ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट को ज्यों का त्यों दोहरा दिया,” सिब्बल ने कहा।
उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को जिस सामग्री के आधार पर कैद किया गया है, वह उससे संबंधित होनी चाहिए, लेकिन इस मामले में असंगत तथ्यों को आधार बनाया गया।
इससे पहले आंगमो ने अदालत में कहा था कि वांगचुक का लेह में दिया गया भाषण हिंसा भड़काने के लिए नहीं, बल्कि उसे रोकने के उद्देश्य से था। उन्होंने कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर उनके पति को अपराधी के रूप में पेश किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि वांगचुक ने 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा की खुलकर निंदा की थी और सोशल मीडिया पर इसे ‘लद्दाख की तपस्या की हार’ बताया था। “यह उनके जीवन का सबसे दुखद दिन था,” उन्होंने अदालत को बताया।
लेह के जिलाधिकारी ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वांगचुक की हिरासत वैध है और वह राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और आवश्यक सेवाओं के लिए खतरा बन गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक को हिरासत के कारण बताए गए थे और उनके साथ हिरासत में कोई गलत व्यवहार नहीं किया गया।
वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को NSA के तहत गिरफ्तार किया गया था, जो 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसक घटनाओं के दो दिन बाद की कार्रवाई थी। उस हिंसा में राज्य की मांग और छठी अनुसूची के दर्जे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में चार लोगों की मौत और 90 घायल हुए थे। सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।
एनएसए के तहत बिना मुकदमा चलाए किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में लिया जा सकता है, बशर्ते उसे समय रहते उचित कानूनी प्रक्रिया का अवसर मिले।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोई अंतरिम राहत नहीं दी, लेकिन यह संकेत दिया कि मामले की अगली सुनवाई शनिवार को होगी। वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर देश-विदेश में मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।
सोनम वांगचुक, रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और हिमालयी क्षेत्रों में टिकाऊ विकास के लिए काम करने वाले पर्यावरणविद् हैं, जो शिक्षा व जलवायु संरक्षण के क्षेत्र में अपने नवाचारों के लिए जाने जाते हैं।

