महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव की समयसीमा सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते बढ़ाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने के लिए राज्य चुनाव आयोग (SEC) को दो सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत दे दी। यह फैसला चुनाव आयोग द्वारा दायर एक आवेदन पर आया, जिसमें 31 जनवरी की तय समयसीमा से 10 दिन की बढ़ोतरी की मांग की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह की दलीलों को सुनते हुए यह अनुमति दी। सिंह ने बताया कि कुछ जिलों और पंचायतों के चुनाव बाकी हैं, जिन्हें संपन्न कराने के लिए अतिरिक्त समय जरूरी है।

पीठ ने SEC के आवेदन को आधिकारिक तौर पर पंजीकृत करने का निर्देश देते हुए दो सप्ताह का समय विस्तार दे दिया।

सुनवाई के दौरान पीठ के समक्ष एक अन्य याचिका भी आई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्थानीय निकायों में आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने बताया कि कुल आरक्षण अब 52 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव तो कराए जाएंगे, लेकिन उनका परिणाम याचिकाओं के अंतिम निपटारे के अधीन रहेगा।
“अगर 50 प्रतिशत की लक्ष्मण रेखा पार हो गई है, तब भी चुनाव होंगे लेकिन उनके परिणाम इन याचिकाओं के निर्णय पर निर्भर करेंगे,” पीठ ने कहा।

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सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कोई नई हस्तक्षेप याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह की अर्जियां केवल चुनाव प्रक्रिया को टालने के उद्देश्य से दायर की जा रही हैं और अब इन्हें केवल चुनाव के बाद ही सुना जाएगा।

सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि महाराष्ट्र में stalled स्थानीय निकाय चुनाव 31 जनवरी 2026 तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। कोर्ट ने राज्य सरकार और SEC को यह भी कहा था कि अगर किसी प्रकार की लॉजिस्टिक सहायता चाहिए, तो 31 अक्टूबर 2025 से पहले ही आवेदन दायर करें, उसके बाद कोई प्रार्थना स्वीकार नहीं की जाएगी।

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मई 2025 में अदालत ने एक अंतरिम आदेश जारी कर चुनाव चार महीने के भीतर—सितंबर 2025 तक—पूरा करने का निर्देश दिया था। हालांकि SEC समय पर अधिसूचना जारी करने में विफल रही और त्योहारों व कर्मचारियों की कमी जैसे कारणों का हवाला दिया।

याचिकाकर्ताओं ने समय बढ़ाने का विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि SEC अनावश्यक रूप से पूरी प्रक्रिया फिर से कर रही है और हर बार बहाने बना रही है। अदालत पहले ही साफ कर चुकी है कि यह आखिरी विस्तार है और अब और विलंब नहीं सहा जाएगा।

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