मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को पुलिस को निर्देश दिया कि वह उस पुस्तक की सभी प्रतियां जब्त करे जिसमें हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन के खिलाफ आपत्तिजनक, अशोभनीय और मानहानिपूर्ण सामग्री व चित्र प्रकाशित किए गए हैं। यह पुस्तक 8 जनवरी को चेन्नई पुस्तक मेले में प्रदर्शित की जानी थी।
मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी अरुलमुरुगन की खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता पी. नवीनप्रसाद द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली कि चेन्नई पुस्तक मेले में एक पुस्तक का विमोचन किया जाएगा, जो स्पष्ट रूप से न्यायमूर्ति स्वामीनाथन को लक्षित करती है। उन्होंने कहा कि उस पुस्तक का शीर्षक ही अपमानजनक, अश्लील और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, “याचिका में प्रस्तुत सामग्री के आधार पर यह प्रतीत होता है कि प्रस्तावित पुस्तक का शीर्षक और उसमें प्रदर्शित चित्र अत्यंत आपत्तिजनक और अपमानजनक हैं, जो सभी सीमाओं को पार करते हैं और जिनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करना आवश्यक है।”
कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में पांचवें प्रतिवादी ‘कीज़ैकात्रु पब्लिशर्स’ के विरुद्ध स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए इच्छुक है। अदालत ने प्रकाशक को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब तलब किया है।
राज्य सरकार की ओर से उपस्थित सरकारी वकील को निर्देश दिया गया कि वह तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करें ताकि ऐसी कोई भी पुस्तक, जिसमें न्यायपालिका या न्यायाधीशों के विरुद्ध अपमानजनक चित्रण या टिप्पणी हो, प्रकाशित या वितरित न की जाए।
अदालत ने कहा कि पुलिस ऐसी सामग्री को जब्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए, चाहे वह मुद्रित हो या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में उपलब्ध हो।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को तय की है और राज्य सरकार से उस दिन तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

