सबरीमाला सोना घोटाला: सोने से जड़े और प्लेटें हटाने की बड़ी साजिश का खुलासा, SIT ने केरल हाईकोर्ट में बताया — पूर्व TDB अध्यक्ष और जौहरी की जमानत याचिका का विरोध

सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा मंदिर से सोने की चोरी के मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने केरल हाईकोर्ट को मंगलवार को बताया कि जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने मंदिर के गर्भगृह (श्रीकोविल) में लगी अन्य सोने से मढ़ी प्लेटों को हटाकर उसमें लगे सोने को हड़पने की बड़ी साजिश रची थी।

SIT ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के पूर्व अध्यक्ष ए पद्मकुमार और कर्नाटक के बेल्लारी स्थित जौहरी रोड्डम पांडुरंगैया नागा गोवर्धन की जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए हाईकोर्ट में कहा कि यह मामला केवल एक बार की चोरी का नहीं, बल्कि सुनियोजित संगठित आपराधिक षड्यंत्र है, जिसमें मंदिर प्रशासन के कुछ अधिकारी भी शामिल थे।

SIT ने अदालत को बताया, “जांच में पता चला है कि देवस्वम अधिकारियों ने प्रारंभिक पत्राचार से लेकर दरवाजों की प्लेटें, द्वारपालक मूर्तियों की प्लेटें और खंभों की प्लेटें बेंगलुरु के व्यापारी उन्नीकृष्णन पोटी को अनधिकृत रूप से सौंप दीं। यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।”

बेंगलुरु निवासी उन्नीकृष्णन पोटी इन दोनों मामलों का मुख्य आरोपी है। इस घोटाले में आरोप है कि द्वारपालक (गेटकीपर) की मूर्तियों और मंदिर के गर्भगृह के दरवाजों पर लगी तांबे की प्लेटों से सोना गायब कर दिया गया।

SIT ने बताया कि गोवर्धन, चेन्नई की “स्मार्ट क्रिएशंस” कंपनी के CEO पंकज भंडारी, उन्नीकृष्णन पोटी और अन्य आरोपियों ने मिलकर मंदिर की प्लेटों पर चढ़े सोने को हड़पने की साजिश रची थी।

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“जांच में यह भी सामने आया है कि ये सभी आपराधिक गतिविधियां एक बड़े षड्यंत्र और संगठित अपराध का हिस्सा थीं। इनका मकसद मंदिर के गर्भगृह में लगी अन्य सोने की प्लेटों को भी हटाकर सोने को निकालना था,” SIT ने अपने हलफनामे में कहा।

SIT ने दावा किया कि गोवर्धन, पंकज भंडारी और पोटी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से यह सामने आया कि अक्टूबर 2025 में जब यह मामला हाईकोर्ट में लंबित था, तब तीनों ने बेंगलुरु में एक गुप्त बैठक की थी। SIT के अनुसार, इस बैठक का उद्देश्य 2019 में हुए अपराध को छिपाना था।

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भंडारी और गोवर्धन को 19 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। अब तक इस घोटाले से जुड़े दो मामलों में कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

SIT ने पद्मकुमार की जमानत याचिका का विरोध करते हुए उन पर “गंभीर सरकारी कदाचार” और “जानबूझकर गलत कागजात तैयार करने” का आरोप लगाया। जांच एजेंसी ने कहा कि पद्मकुमार ने सोने से मढ़ी प्लेटों को केवल “तांबे की प्लेट” बताकर पोटी और अन्य आरोपियों के लिए मंदिर के कीमती सोने को हड़पने का रास्ता साफ किया, जिससे देवस्वम बोर्ड को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और आरोपियों को अनुचित लाभ मिला।

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हाईकोर्ट ने पद्मकुमार और गोवर्धन की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 8 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी है। इसके अलावा सोमवार को अदालत ने SIT को जांच पूरी करने के लिए छह सप्ताह का अतिरिक्त समय भी दे दिया।

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