अवैध आम के पेड़ों की कटाई पर PIL में आदेशों की अनदेखी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार पर ₹40,000 जुर्माना, शीर्ष वन अधिकारियों को किया तलब

उत्तर प्रदेश के आम बेल्ट में अवैध रूप से आम के पेड़ों की कटाई को लेकर दायर एक दशक पुराने जनहित याचिका (PIL) में लगातार आदेशों की अनदेखी से नाराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार पर ₹40,000 का जुर्माना लगाया और प्रमुख सचिव (वन), मुख्य वन संरक्षक एवं लखनऊ के प्रभागीय वन अधिकारी को 13 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

यह याचिका अधिवक्ता जयंत सिंह तोमर ने 2013 में दायर की थी। इसमें उत्तर प्रदेश के आम बेल्ट में हो रही अवैध पेड़ कटाई और पर्यावरणीय नुकसान पर चिंता जताई गई थी।

हाईकोर्ट ने जनवरी 2014 में राज्य सरकार को संबंधित जानकारी देने का आदेश दिया था, जिसमें पेड़ों का जिओ-टैगिंग और कटाई पर रोक संबंधी कदम शामिल थे।

जब सरकार ने आदेश का पालन नहीं किया, तो अदालत ने 12 नवंबर 2025 को ₹15,000 का जुर्माना लगाया था। मगर सोमवार की सुनवाई में अदालत ने पाया कि ना तो आदेशों का पूर्ण पालन हुआ और ना ही यह स्पष्ट किया गया कि पिछले जुर्माने की राशि जमा हुई या नहीं।

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राज्य सरकार की ओर से पेश वकील यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि ₹15,000 का पूर्व जुर्माना जमा हुआ या नहीं।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने कोर्ट को बताया कि 2014 के आदेश में ही पेड़ों के जिओ-टैगिंग और कटाई के मुद्दे उठाए गए थे। इस पर सरकार के वकील ने जवाब दिया कि जिओ-टैगिंग 2018 से शुरू हुई है, लेकिन पहले की अवधि में क्या कदम उठाए गए, इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं दिया गया।

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अदालत ने बागवानी विभाग के प्रमुख सचिव को भी व्यक्तिगत रूप से तलब किया है, क्योंकि उन्होंने इस संबंध में कोई लिखित निर्देश अदालत को नहीं सौंपा।

अब यह मामला 13 जनवरी 2026 को फिर से सुना जाएगा।

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