बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के कमिश्नर भूषण गगरानी को सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में उस वक्त शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब उन्होंने यह स्वीकार किया कि उन्होंने अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए बुलाने वाले पत्र “गलती से” जारी किए थे। कोर्ट ने इस कार्रवाई को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया और तीखी टिप्पणी की – “खुद को बचाइए।”
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंकल की पीठ ने पूछा, “आप किस अधिकार के तहत उन्हें बुला सकते हैं? आपके पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है।” अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक कर्मियों को चुनाव ड्यूटी पर लगाने का फैसला केवल हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।
हाईकोर्ट की स्वतः संज्ञान कार्रवाई
यह मामला तब सामने आया जब हाईकोर्ट ने गत सप्ताह स्वतः संज्ञान लेते हुए गगरानी के उन पत्रों पर रोक लगा दी थी जिनमें उन्होंने अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को नगर निकाय चुनाव में ड्यूटी देने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने पूछा था कि क्या जिला निर्वाचन अधिकारी के तौर पर कार्यरत बीएमसी कमिश्नर के पास ऐसा आदेश जारी करने का कोई वैधानिक आधार है।
22 दिसंबर 2025 को गगरानी ने अधीनस्थ अदालतों के सभी कर्मचारियों को पत्र जारी कर चुनाव ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने को कहा था। उसी दिन मुख्य महानगर दंडाधिकारी और हाईकोर्ट के निरीक्षण रजिस्ट्रार ने उन्हें सूचित किया था कि कोर्ट ने प्रशासनिक रूप से अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने का निर्णय लिया है।
इसके बावजूद, 29 दिसंबर को गगरानी ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि चुनाव ड्यूटी से छूट का अनुरोध अस्वीकार किया जा रहा है।
कोर्ट के आदेश के बाद पत्र वापस
हाईकोर्ट के आदेश के बाद, कमिश्नर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रवि कदम ने बताया कि कमिश्नर ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और सभी पत्र वापस ले लिए गए हैं। कदम ने कहा, “यह गलती थी। अब सभी अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि कोर्ट स्टाफ को नहीं बुलाया जा सकता।”
हालांकि, कदम ने बताया कि इसके बाद भी एक रिटर्निंग ऑफिसर ने शेरिफ कार्यालय को पत्र लिखकर दो कर्मचारियों की मांग की थी, लेकिन वह भी अब निरस्त कर दिया गया है।
संविधान के अनुच्छेद 235 का हवाला
कोर्ट ने अपने पुराने प्रशासनिक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि 2008 में हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने यह तय किया था कि हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से छूट दी जाएगी। संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत हाईकोर्ट को अधीनस्थ न्यायपालिका और उसके कर्मचारियों पर पूर्ण नियंत्रण और पर्यवेक्षण प्राप्त है।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है और कहा कि यह सुनवाई चुनावों के बाद होगी।
कोर्ट की टिप्पणी:
“अब खुद को बचाइए। दूसरी जगह से व्यवस्था कीजिए। हम चुनाव के बाद आपकी बात सुनेंगे।”
कानूनी संदर्भ:
- अनुच्छेद 235 (भारतीय संविधान): हाईकोर्ट को अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण और पर्यवेक्षण का अधिकार देता है।
- 2008 का एचसी प्रशासनिक आदेश: अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से छूट देता है।

