मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पर्वतारोही मधुसूदन पाटीदार की याचिका खारिज की; विक्रम पुरस्कार भूवना देहरिया को देने के राज्य सरकार के निर्णय को सही ठहराया

इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को पर्वतारोही मधुसूदन पाटीदार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2023 के एडवेंचर स्पोर्ट्स श्रेणी में राज्य के सर्वोच्च खेल सम्मान ‘विक्रम पुरस्कार’ पर वरिष्ठता के आधार पर अपना दावा किया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने इस पुरस्कार को पर्वतारोही भूवना देहरिया को देने में कोई त्रुटि नहीं की।

न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि पाटीदार का दावा “किसी भी गुण से रहित” है और उनका एवरेस्ट फतह करना निर्धारित पात्रता अवधि से बाहर आता है।

पाटीदार, जो इंदौर निवासी हैं, ने हाईकोर्ट में यह दलील दी थी कि वे 2017 में माउंट एवरेस्ट फतह कर चुके हैं और वरिष्ठता के आधार पर उन्हें एडवेंचर स्पोर्ट्स श्रेणी में विक्रम पुरस्कार दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उनकी अभ्यावेदन पर कोई निर्णय लिए बिना ही पुरस्कार देहरिया के पक्ष में घोषित कर दिया।

गौरतलब है कि 5 अगस्त को हाईकोर्ट ने शिखर खेल सम्मान समारोह शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही देहरिया को पुरस्कृत करने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

अदालत ने अभिलेखों का परीक्षण कर पाया कि पाटीदार की एवरेस्ट चढ़ाई वर्ष 2017 में हुई, जो 2023 के पुरस्कार वर्ष से पांच वर्ष पहले की पात्रता अवधि से बाहर है।

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मध्यप्रदेश पुरस्कार नियम 2021 में यह प्रावधान है कि एडवेंचर स्पोर्ट्स श्रेणी में आवेदक पिछले पांच वर्षों से लगातार एडवेंचर गतिविधियों में भाग ले रहा हो और उत्कृष्ट प्रदर्शन तथा उपलब्धि प्राप्त की हो।

अदालत ने कहा कि पाटीदार आठ वर्ष पूर्व एवरेस्ट फतह करने के कारण 2023 के पुरस्कार के लिए पात्र नहीं थे, इसलिए राज्य सरकार का उनका दावा अस्वीकार करना उचित था।

न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा:

“फलस्वरूप, याचिका में कोई गुण नहीं है और इसे खारिज किया जाता है। उपर्युक्त चर्चा के मद्देनजर मुझे प्रतिवादी क्रमांक 1 तथा 2 द्वारा प्रतिवादी क्रमांक 3 के पक्ष में एडवेंचर स्पोर्ट्स श्रेणी में विक्रम पुरस्कार देने में कोई त्रुटि प्रतीत नहीं होती।”

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अदालत में पाटीदार की ओर से अधिवक्ता अंकुर तिवारी और देहरिया की ओर से अधिवक्ता अनुनेय श्रीवास्तव उपस्थित हुए।

विक्रम पुरस्कार राज्य का सर्वोच्च खेल सम्मान है, जिसकी शुरुआत 1972 में हुई थी। विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 12 वरिष्ठ खिलाड़ियों को यह सम्मान प्रदान किया जाता है। पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों को ₹2 लाख की राशि, एक स्मृति-चिह्न दिया जाता है और उन्हें उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किया जाता है, साथ ही सरकारी सेवा नियुक्ति का अवसर भी प्रदान किया जाता है।

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