थिरुप्परंकुंद्रम में कार्तिगई दीपम दीप जलाने के विवाद पर सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने शुक्रवार को न्यायपालिका के खिलाफ की जा रही अपमानजनक टिप्पणियों पर सख्त नाराजगी जताई और स्पष्ट चेतावनी दी कि अदालत को “कमज़ोर” करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन और न्यायमूर्ति के के रामकृष्णन की खंडपीठ ने यह मौखिक टिप्पणियां उस समय कीं जब याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता एम आर वेंकटेश ने कहा कि एकल न्यायाधीश, जिन्होंने दीप जलाने की अनुमति दी थी, उनके खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणियां की जा रही हैं।
इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा:
“कानून का उल्लंघन करने वाले यह सोचते हैं कि कोई प्रतिक्रिया नहीं होगी। कृपया अपने मुवक्किलों को कहिए कि अदालत की सहनशीलता की परीक्षा न लें और न्यायपालिका को बदनाम न करें।”
पीठ ने चेताया कि अगर इस तरह की टिप्पणियां जारी रहीं तो कार्रवाई की जाएगी।
न्यायालय ने सख्त शब्दों में कहा:
“आप सत्ता में हैं या नहीं, आपकी ज़ुबान है या नहीं, जो भी हो… अगर आप संस्था को कमजोर करेंगे तो संविधान सिर्फ कागज़ पर रह जाएगा।”
अदालत ने यह भी कहा कि केवल इसलिए कि न्यायाधीश खुलकर प्रतिक्रिया नहीं देते, इसका यह मतलब नहीं कि लोग लगातार उकसाते रहें। अगर सीमा लांघी गई तो कड़ी कार्रवाई होगी।
एक दिसंबर को न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन ने अरुलमिघु सुब्रह्मण्य स्वामी मंदिर प्रबंधन को निर्देश दिया था कि 3 दिसंबर की शाम थिरुप्परंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित प्राचीन दीपथून (पत्थर स्तंभ) पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति दी जाए।
हालांकि आदेश का पालन नहीं हुआ, जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने मंदिर प्राधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की।
इसी बीच मंदिर के कार्यकारी अधिकारी, मदुरै जिला कलेक्टर और पुलिस आयुक्त ने एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द करने के लिए खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया।
खंडपीठ ने कहा कि वह इस मामले में शामिल सभी पक्षों की अपीलें एक साथ सुनेगी।
पीठ ने स्पष्ट किया —
“हम सभी को साथ सुनेंगे। जो पक्ष पहले से केस में शामिल हैं, केवल वही अपनी याचिकाएं दायर कर सकेंगे। किसी और को पक्षकार नहीं बनाया जाएगा।”
अदालत ने कार्तिगई दीपम मामले में दायर अपीलों की सुनवाई 12 दिसंबर तय की है।
उधर अवमानना याचिका में न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने याचिकाकर्ता रमा रविकुमार की याचिका की सुनवाई अगले आदेश तक 9 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
यह मामला अब दो ट्रैकों पर आगे बढ़ रहा है—एक ओर कार्तिगई दीपम पर दिए गए आदेश की वैधता पर खंडपीठ विचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसके अनुपालन न होने पर अवमानना की कार्रवाई लंबित है—और इसी बीच हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में यह चेतावनी दे दी है कि न्यायपालिका की गरिमा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।

