₹3,500 करोड़ आंध्र प्रदेश शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने तीन आरोपियों को आत्मसमर्पण से अंतरिम सुरक्षा दी, हाईकोर्ट का आदेश रोका

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के कथित ₹3,500 करोड़ के शराब घोटाले में आरोपी तीन व्यक्तियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें आत्मसमर्पण से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उनकी डिफॉल्ट बेल रद्द कर आत्मसमर्पण का निर्देश दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की पीठ ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आंध्र प्रदेश सरकार समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया और कहा कि राज्य 10 दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करे।
तब तक, तीनों याचिकाकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने से छूट रहेगी, बशर्ते वे ट्रायल कोर्ट द्वारा पहले लगाए गए शर्तों का पालन करें।

सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले में गवाहों की भारी संख्या पर चिंता जताई।

CJI ने कहा,
“यहां 400 गवाह हैं और अंत में यह संख्या 200 हो सकती है। मान लें 100 गवाह भी हों, तो आप इसमें कितना समय लेंगे? डिफॉल्ट बेल के मामलों में कई बार नियमित जमानत पर विचार होने से याचिकाएँ निरर्थक हो जाती हैं। यदि निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित किए बिना किसी को स्वतंत्रता दी जा सकती है, तो अदालतें ऐसा कर सकती हैं।”

राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए। उन्होंने कहा कि पहले ट्रायल कोर्ट ने चार्जशीट खारिज कर दी थी, लेकिन अब चार्जशीट बहाल हो चुकी है और राज्य प्रयास करेगा कि ट्रायल तेज हो।

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इस पर CJI ने कहा,
“हम अकादमिक बहस में समय नहीं बर्बाद करना चाहते। हमें बताइए कि इन्हें हिरासत में रखने से क्या उद्देश्य पूरा होगा? हम जानते हैं कि इनमें से एक वरिष्ठ अधिकारी थे। यदि आपको लगता है कि गवाहों पर असर पड़ सकता है, तो हम शर्तें लगा सकते हैं।”

  • के. धनुंजय रेड्डी — सेवानिवृत्त IAS अधिकारी और पूर्व में मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव
  • पेल्लाकुरु कृष्ण मोहन रेड्डी — पूर्व CM वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के OSD
  • बालाजी गोविंदप्पा — भारत सीमेंट्स के पूर्व निदेशक
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याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी. ए. सुंदरम, मुकुल रोहतगी और सिद्धार्थ डेव उपस्थित थे।

अभियोजन के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच पिछली YSRCP सरकार के दौरान एक राजनीतिक–व्यावसायिक गठजोड़ के जरिए विशाल शराब घोटाला संचालित किया गया। आरोपों में शामिल हैं:

  • शराब खरीद प्रक्रिया में धांधली
  • लोकप्रिय ब्रांड्स को दबाकर नए ब्रांड्स को बढ़ावा देना
  • बड़े पैमाने पर कमीशन/किकबैक लेना
  • सरकारी अधिकारियों और कारोबारी इकाइयों के बीच सांठ–गांठ
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जांच एजेंसियों ने कई आरोपपत्र दायर किए हैं और आगे की जांच जारी है।

सुप्रीम कोर्ट अब राज्य सरकार का जवाब मिलने के बाद मामले पर आगे सुनवाई करेगा।
तब तक, तीनों आरोपी आत्मसमर्पण से सुरक्षित रहेंगे और डिफॉल्ट बेल रद्द होने के आदेश पर रोक जारी रहेगी।

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