केरल हाईकोर्ट ने एडीजीपी एम. आर. अजीत कुमार के खिलाफ जांच का आदेश रद्द किया; कहा—पीसी एक्ट के तहत अनुमति अनिवार्य

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम विजिलेंस स्पेशल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें केरल के एडीजीपी एम. आर. अजीत कुमार के खिलाफ disproportionate assets मामले में जांच के निर्देश दिए गए थे। न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत द्वारा दिया गया आदेश प्रक्रिया संबंधी खामियों से ग्रस्त था।

हालांकि, हाईकोर्ट ने कुमार की वह याचिका खारिज कर दी जिसमें उन्होंने उनके खिलाफ दर्ज शिकायत को पूरी तरह रद्द करने की मांग की थी।

विजिलेंस स्पेशल कोर्ट ने पहले विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) की प्राथमिक जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया था, जिसमें कुमार को क्लीन चिट दी गई थी, और आगे जांच के निर्देश दिए थे। यह शिकायत वकील नेय्याट्टिनकरा पी. नगराज और पूर्व नीलांबुर विधायक पी. वी. अनवर द्वारा दायर की गई है।

इसी आदेश को चुनौती देते हुए कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

जस्टिस ए. बदरूद्दीन की पीठ ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमे की शुरुआत से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि PC Act, 2018 की धारा 19(1) के तहत स्वीकृति प्राप्त किए बिना किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री केरल के संबंध में विजिलेंस कोर्ट द्वारा पारित सभी टिप्पणियों को भी रिकॉर्ड से हटाया

  • जांच के लिए विजिलेंस कोर्ट का आदेश रद्द
  • शिकायत को रद्द करने की मांग अस्वीकृत
  • शिकायत आगे तभी बढ़ सकेगी जब धारा 19(1) PC Act के तहत सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति प्राप्त कर अदालत में प्रस्तुत की जाए
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अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता स्वीकृति प्राप्त करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से आवेदन कर सकते हैं और स्वीकृति मिलने पर उसे स्पेशल कोर्ट के समक्ष पेश किया जा सकता है।

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