सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह निर्धारित किया है कि कोई भी हाईकोर्ट, दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.PC) की धारा 482 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, किसी फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) को रद्द करने के लिए ‘मिनी-ट्रायल’ (लघु-सुनवाई) नहीं कर सकता। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ
