किसानों को मुआवज़ा और ब्याज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ओपन कोर्ट में सुनेगा NHAI की पुनर्विचार याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की उस पुनर्विचार याचिका पर खुले न्यायालय में सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें फरवरी 2025 के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत किसानों को ज़मीन अधिग्रहण पर मुआवज़ा और ब्याज देने का लाभ पूर्व प्रभाव (retrospective) से लागू किया गया था।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ ने मंगलवार को NHAI की याचिका पर नोटिस जारी किया और 11 नवंबर 2025 दोपहर 3 बजे खुले न्यायालय में सुनवाई तय की।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो NHAI की ओर से पेश हुए, ने अदालत को बताया कि इस मामले के वित्तीय प्रभाव लगभग ₹32,000 करोड़ तक हैं, जबकि याचिका में पहले इसे ₹100 करोड़ बताया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी 2025 को NHAI की उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने मांग की थी कि 2019 के फैसले (Union of India v. Tarsem Singh) का लाभ केवल भावी (prospective) मामलों पर लागू हो। अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि यह निर्णय 1997 से 2015 के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत अधिग्रहित सभी भूमि पर लागू होगा।

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2019 के तरसेम सिंह फैसले में शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा 3J को असंवैधानिक (violative of Article 14) ठहराया था, क्योंकि यह भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के लाभ — जैसे ‘सलामी राशि (solatium)’ और ब्याज — से किसानों को वंचित करती थी।

फरवरी में दिए गए निर्णय में पीठ ने दोहराया था:

“हम NHAI की दलीलों में कोई दम नहीं पाते। तरसेम सिंह में स्थापित सिद्धांतों की पुनः पुष्टि करते हैं कि ‘सलामी राशि’ और ब्याज देना एक कल्याणकारी कदम है और ऐसी वर्गीकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती जो तर्कसंगत भेद (intelligible differentia) से रहित हो।”

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अदालत ने यह भी कहा था कि अगर फैसला केवल भविष्य के मामलों पर लागू किया जाए, तो यह तरसेम सिंह के मूल उद्देश्य को “निरर्थक बना देगा” और समान स्थिति वाले किसानों के बीच असमानता उत्पन्न करेगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि 1997 से 2015 के बीच अधिग्रहित भूमि के मालिकों को ही ‘सलामी राशि’ और ब्याज का लाभ मिलेगा और पहले से निपट चुके मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा।

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अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को खुले न्यायालय में सुनने का निर्णय लिया है, यह मामला सरकार पर भारी वित्तीय प्रभाव डाल सकता है और देशभर में पुराने राजमार्ग अधिग्रहण मामलों में मुआवज़े की रूपरेखा तय कर सकता है।

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