रोहित पवार की कंपनी ने महाराष्ट्र सरकार के गन्ना लेवी आदेश को दी चुनौती; बॉम्बे हाईकोर्ट ने 50% जमा करने की शर्त पर लाइसेंस जारी करने का निर्देश दिया


एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार की कंपनी बारामती एग्रो लिमिटेड ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा गन्ना पेराई पर लगाए गए लेवी के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। अदालत ने गुरुवार को अंतरिम राहत देते हुए कंपनी को अपने क्रशिंग लाइसेंस के लिए 50% राशि जमा करने की शर्त पर अनुमति दी है।

जस्टिस मंजुषा देशपांडे की अवकाश पीठ ने बारामती एग्रो लिमिटेड को निर्देश दिया कि वह मुख्यमंत्री राहत कोष, गोपीनाथ मुंडे ऊसतोड कामगार कल्याण महामंडल और बाढ़ राहत कोष—तीनों मदों के तहत कुल लेवी की 50% राशि तीन दिनों में जमा करे। इसके बाद कंपनी का क्रशिंग लाइसेंस प्रोसेस किया जाएगा।

अदालत ने कहा, “इस बीच, याचिकाकर्ता द्वारा दी गई आश्वस्ति के आधार पर संबंधित प्राधिकरण उसका क्रशिंग लाइसेंस प्रक्रिया में ले।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिका में अंततः कंपनी सफल होती है, तो जमा की गई राशि ब्याज सहित वापस की जाएगी।

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राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी करते हुए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को निर्धारित की है।

राज्य सरकार ने 30 सितंबर को निर्णय लिया था कि 2025–26 पेराई सत्र से प्रत्येक टन गन्ना पेराई पर मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए ₹10, गोपीनाथ मुंडे ऊसतोड कामगार कल्याण महामंडल के लिए ₹10 और बाढ़ राहत कोष के लिए ₹5 प्रति टन का लेवी वसूला जाएगा।

इस नीति के अनुसार, जब तक यह राशि जमा नहीं की जाती, शुगर फैक्ट्रियों को नए सीजन का क्रशिंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। यह निर्देश 27 अक्टूबर को चीनी आयुक्त द्वारा जारी पत्र में सभी शुगर मिलों को भेजा गया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता गिरीश गोडबोले ने बारामती एग्रो की ओर से दलील दी कि लाइसेंस को इस तरह की शर्त से जोड़ना कानूनी रूप से अनुचित है क्योंकि यह किसी विधिक प्रावधान या अधिनियम पर आधारित नहीं है।

उन्होंने बताया कि इस फैसले को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाएं भी हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ में लंबित हैं, जहाँ अदालत ने याचिकाकर्ताओं को 50% राशि जमा करने पर लाइसेंस प्रक्रिया की अनुमति दी थी।

गोडबोले ने कहा कि बारामती एग्रो भी मुख्यमंत्री राहत कोष और गोपीनाथ मुंडे कल्याण महामंडल के लिए 50% राशि जमा करने को तैयार है, लेकिन बाढ़ राहत कोष के लिए ₹5 प्रति टन की लेवी पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था, क्योंकि यह किसी कार्यकारी आदेश या अधिनियम द्वारा समर्थित नहीं है।

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हालाँकि, जस्टिस देशपांडे ने कंपनी को तीनों मदों के तहत कुल लेवी की 50% राशि जमा करने का निर्देश दिया।

सरकार के इस कदम की विपक्ष ने तीखी आलोचना की है। एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने कहा था कि सरकार को बारिश से प्रभावित किसानों की मदद खुद करनी चाहिए, न कि गन्ना उत्पादकों पर अतिरिक्त बोझ डालना चाहिए।

वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम मराठवाड़ा क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए जरूरी है।

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