2014 काठगोदाम दुष्कर्म-हत्या मामला: उत्तराखंड सरकार करेगी सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को घोषणा की कि राज्य सरकार 2014 में नैनीताल जिले के काठगोदाम में सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले में आरोपी की बरी होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर करेगी।

धामी ने न्याय सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा, “न्याय विभाग को इस मामले में समीक्षा याचिका दायर करने और दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार अपनी सर्वश्रेष्ठ कानूनी टीम लगाएगी। देवभूमि में ऐसे जघन्य अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार पीड़िता के परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।”

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्यभर में असामाजिक तत्वों की पहचान और निगरानी के लिए सत्यापन अभियान चलाए जा रहे हैं।

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पीड़िता नवंबर 2014 में लापता हो गई थी और उसका शव पांच दिन बाद बरामद हुआ, जिससे व्यापक आक्रोश फैल गया। मार्च 2016 में विशेष अदालत ने अख्तर अली को मौत की सज़ा और सह-आरोपी प्रेमपाल को पांच साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई थी। 2019 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अली की फांसी की सजा को बरकरार रखा।

हालांकि, 10 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने अली को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ प्रस्तुत डीएनए परीक्षण साक्ष्य अविश्वसनीय है क्योंकि यह एक वनस्पति विशेषज्ञ ने किया था, जिसे मानव डीएनए प्रोफाइलिंग का कोई अनुभव नहीं था।

अली को बरी करते हुए शीर्ष अदालत ने निचली अदालतों को चेतावनी दी कि “पूंजी दंड” को बिना सर्वोच्च स्तर के प्रमाण और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित किए “यांत्रिक ढंग से” लागू करना न्याय व्यवस्था को कमजोर करता है और किसी निर्दोष की जिंदगी छीनकर न्याय की सबसे बड़ी भूल का कारण बन सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नैनीताल जिले में लोगों ने प्रदर्शन किए और सरकार से इस फैसले को चुनौती देने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। पीड़िता के चाचा ने चेतावनी दी कि यदि समीक्षा याचिका दाखिल नहीं हुई तो वे आत्मदाह करेंगे। इसके बाद सरकार ने त्वरित कदम उठाने का आश्वासन दिया।

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