झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह निर्धारित किया है कि रिश्वतखोरी जैसे गंभीर कदाचार के आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही, समान तथ्यों पर आधारित आपराधिक मुकदमे के साथ-साथ चल सकती है। मुख्य न्यायाधीश तारलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने लेटर्स पेटेंट अपीलों के एक समूह को खारिज करते
