आपसी समझौते के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच दर्ज दो आपराधिक मुकदमे रद्द किए

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच आपसी समझौते के बाद दहेज उत्पीड़न और अन्य धाराओं से संबंधित दो आपराधिक मुकदमों को रद्द कर दिया है।

एकल पीठ के न्यायमूर्ति आशीष नैथानी ने यह आदेश उस समय पारित किया जब याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह चौहान और उनकी पत्नी अक्षी बिष्ट चौहान ने अदालत को सूचित किया कि वे अब एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज मामलों को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। दोनों ने लिखित में भी अदालत को बताया कि उन्होंने अपने विवाद amicably सुलझा लिए हैं और अब शांति से जीवन व्यतीत करना चाहते हैं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने आपत्ति जताई, लेकिन अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के गियान सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले में दिए गए सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि जब पक्षकार आपसी सहमति से विवाद निपटा लेते हैं तो शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए आपराधिक मुकदमे रद्द किए जा सकते हैं।

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इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), देहरादून की अदालत में लंबित आपराधिक मामले को रद्द कर दिया जिसमें दहेज उत्पीड़न, मारपीट, गाली-गलौज और दहेज निषेध अधिनियम की धाराएं शामिल थीं। इसके साथ ही गर्भपात, ब्लैकमेल और आपराधिक साजिश से जुड़े दूसरे मामले को भी समाप्त कर दिया गया।

अदालत ने कहा कि जब दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद निपटा चुके हैं तो मुकदमों को जारी रखना निरर्थक होगा। इसी के साथ दोनों आपराधिक याचिकाओं का निस्तारण कर दिया गया।

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