सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मेट्रो निर्माण के कारण बंद हो रहे आश्रय गृहों पर NALSA से रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) को निर्देश दिया कि वह दिल्ली में मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के निर्माण कार्य के चलते बंद हो रहे शहरी बेघर आश्रय गृहों का निरीक्षण करे और रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई, न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ 2003 में दाखिल अधिवक्ता ई. आर. कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आनंद विहार और सराय काले खां स्थित आश्रय गृहों के बंद होने का मुद्दा उठाया गया था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि आठ आश्रय गृहों के बंद होने से सैकड़ों लोग बेघर हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि पहले ही छह आश्रय गृह बंद किए जा चुके हैं और अब अधिकारी सराय काले खां और आनंद विहार के आठ और आश्रय गृहों को बंद करने जा रहे हैं, जिनमें इस समय 1,000 से अधिक लोग रह रहे हैं।

दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) ने दिल्ली मेट्रो के निर्माण कार्य के चलते इन आश्रय गृहों को वैकल्पिक स्थानों पर स्थानांतरित करने की अनुमति दी है।

मुख्य न्यायाधीश ने आदेश दिया कि NALSA का एक अधिकारी निरीक्षण कर यह रिपोर्ट दे कि—

  1. आश्रय गृहों में फिलहाल कितने लोग रह रहे हैं।
  2. वैकल्पिक स्थानों पर उन सभी को समायोजित करने की क्षमता है या नहीं।
  3. नए स्थलों पर कौन-कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
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पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि निरीक्षण रात 8 बजे के बाद किया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके, क्योंकि रात में आश्रय लेने वालों की संख्या अधिक हो जाती है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “हम केवल इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं कि स्थानांतरण की अनुमति दी जाए या नहीं। इसके लिए हमें स्वतंत्र जांच की ज़रूरत है।”

शीर्ष अदालत ने NALSA से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। अदालत ने यह भी कहा कि भले ही DUSIB के पास आंकड़े मौजूद हैं, लेकिन बेघरों के अधिकार और गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जाँच आवश्यक है।

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