PM मोदी पर विवादित कार्टून: सुप्रीम कोर्ट ने कार्टूनिस्ट को लगाई कड़ी फटकार; जज बोले- ’50 के हो गए, परिपक्वता नहीं आई’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS पर एक आपत्तिजनक कार्टून पोस्ट करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। मामले की सुनवाई के दौरान देश की सर्वोच्च अदालत ने इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को कड़ी फटकार लगाई और उनकी हरकत को “भड़काऊ और अपरिपक्व” करार दिया। कोर्ट की तल्ख टिप्पणी से मामले में सनसनी फैल गई है, और कार्टूनिस्ट पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने जब सुना कि कार्टूनिस्ट की उम्र 50 वर्ष से अधिक है, तो जस्टिस धूलिया ने नाराजगी जताते हुए कहा, “इतनी उम्र हो गई, फिर भी परिपक्वता नहीं आई। हम मानते हैं कि यह (पोस्ट) भड़काऊ है।”

कोर्टरूम में बहस और पोस्ट डिलीट करने की सहमति

यह पूरा मामला तब गरमाया जब कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट ने कार्टूनिस्ट के आचरण पर गहरी नाराजगी जताई। माहौल की गंभीरता को भांपते हुए कार्टूनिस्ट की वकील, वृंदा ग्रोवर, तुरंत पोस्ट को हटाने के लिए सहमत हो गईं।

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ग्रोवर ने दलील दी कि भले ही कार्टून “खराब स्वाद” का हो सकता है, लेकिन यह कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा, “कार्टून 2021 का है… शब्द मेरे मुवक्किल के नहीं हैं, सिर्फ तस्वीर उनकी है।” इस पर जस्टिस धूलिया ने पूछा, “क्या आप पोस्ट हटाने को तैयार हैं?” वकील ने तुरंत हामी भर दी।

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वहीं, सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने जमानत का पुरजोर विरोध किया और कहा, “इस तरह की चीजों से सामाजिक सद्भाव बिगड़ रहा है और देश भर में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो रही है।”

क्या है पूरा विवादित मामला?

विवाद की जड़ एक कार्टून है, जिसे मालवीय ने 2021 में कोविड वैक्सीन को लेकर बनाया था। लेकिन यह मामला तब तूल पकड़ गया जब मई 2025 में किसी अन्य फेसबुक यूजर ने जातिगत जनगणना के संदर्भ में उसी पुराने कार्टून को आपत्तिजनक टिप्पणियों के साथ फिर से पोस्ट कर दिया। कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय ने इस नई पोस्ट को न केवल शेयर किया, बल्कि उस पर अपनी सहमति भी जताई।

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इसके बाद, RSS के एक सदस्य होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति की शिकायत पर मालवीय के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, हिंसा भड़काने और RSS का अपमान करने के आरोप में FIR दर्ज की गई। मध्य प्रदेश की निचली अदालत और फिर हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मालवीय ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं को लांघा है और उनसे हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

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फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई कल (मंगलवार) तक के लिए टाल दी है। कार्टूनिस्ट को आज कोई राहत नहीं मिली, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब सभी की निगाहें कल होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।

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