बख्शा नहीं जा सकता’: आदेश की अवहेलना पर सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के अधिकारी को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के एक सरकारी अधिकारी को 2014 में गुंटूर ज़िले में झुग्गियों को ज़बरदस्ती हटाने और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के रोक आदेश की अवहेलना करने पर कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह का आचरण “बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”

न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ उस अधिकारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो अब डिप्टी कलेक्टर हैं। वह हाईकोर्ट द्वारा दी गई अवमानना सज़ा को चुनौती दे रहे थे। 2013 के 11 दिसंबर को हाईकोर्ट ने झुग्गियां न हटाने का आदेश दिया था, इसके बावजूद जनवरी 2014 में उन्होंने अवैध रूप से हटवाया।

सुनवाई के दौरान जब पीठ ने पूछा कि क्या वह पदावनति (डिमोशन) स्वीकार करेंगे, तो अधिकारी ने इनकार कर दिया। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें फिर हाईकोर्ट द्वारा दी गई दो महीने की जेल की सज़ा भुगतनी होगी।

READ ALSO  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 बैच के नायब तहसीलदारों की पदोन्नति का रास्ता साफ किया

“यह बख्शा नहीं जा सकता। हाईकोर्ट की चेतावनी के बावजूद अगर कोई ऐसा करता है, तो वह कितना भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है,” न्यायमूर्ति गवई ने टिप्पणी की।

शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारी जेल की सजा भुगतते हैं, तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकार उन्हें दोबारा नियुक्त न करे। “हम ऐसे सख्त शब्दों में टिप्पणी करेंगे कि कोई भी नियोक्ता उन्हें नौकरी पर रखने की हिम्मत नहीं करेगा,” कोर्ट ने कहा।

READ ALSO  [चेक बाउंस मामला] सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए नए दिशानिर्देश – धारा 138 एनआई एक्ट मामलों में अनिवार्य होगा नया सिनॉप्सिस प्रारूप, कम्पाउंडिंग मानकों में संशोधन

जब अदालत को बताया गया कि अधिकारी पदावनति स्वीकार नहीं करना चाहते, तो पीठ ने कहा, “हम उनकी आजीविका को बचाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन अगर उन्हें अपनी ‘पोजीशन’ चाहिए, तो फिर जेल जाएं।”

न्यायमूर्ति गवई ने अधिकारी को फटकारते हुए कहा, “जब 80 पुलिस वालों को लेकर लोगों के घर गिराए तब भगवान की याद नहीं आई आपको?” कोर्ट ने आगे कहा, “हम उनके बच्चों को देखकर उन्हें जेल से बचाना चाह रहे थे। लेकिन अगर वह जिद पर अड़े हैं, तो हम कुछ नहीं कर सकते।”

READ ALSO  वायनाड भूस्खलन पीड़ितों के लिए कोई ऋण माफी नहीं; केवल पुनर्निर्धारण, पुनर्गठन: केंद्र ने केरल हाईकोर्ट को बताया

पीठ ने यह भी कहा कि अधिकारी शायद इस गलतफहमी में हैं कि दो महीने की सजा काटने के बाद उन्हें फिर से नौकरी मिल जाएगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 9 मई को तय की है।

इससे पहले 21 अप्रैल को हुई सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारी से पूछा था कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना क्यों की। उनके वकील ने माना था कि अधिकारी को आदेश का पालन करना चाहिए था।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles