मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को छात्र सुरक्षा उपायों पर रिपोर्ट देने का आदेश दिया

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को राज्य भर के सरकारी स्कूलों में “छात्र सुरक्षा सलाहकार समितियों” के कार्यान्वयन पर एक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह आदेश शैक्षणिक सेटिंग्स में यौन शोषण के मामलों में वृद्धि पर बढ़ती चिंताओं के जवाब में आया है।

मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति जे निशा बानू और न्यायमूर्ति एस श्रीमति ने थेनी जिले की अधिवक्ता जी शबना द्वारा शुरू की गई एक जनहित याचिका (पीआईएल) के बाद यह निर्देश जारी किया। जनहित याचिका में स्कूलों में यौन उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षात्मक उपायों को पर्याप्त रूप से लागू करने में विफलता को संबोधित किया गया था, जैसा कि 17 जून, 2021 को जारी एक सरकारी आदेश द्वारा अनिवार्य किया गया था।

वकील शबना ने बताया कि छात्रों को यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार से बचाने के लिए दिशा-निर्देश स्थापित किए गए थे, लेकिन उनका क्रियान्वयन असंतोषजनक रहा है। शबना ने टिप्पणी की, “ये उपाय काफी हद तक कागजों पर ही रह गए हैं,” उन्होंने हाल ही में हुए कई उल्लंघनों पर प्रकाश डाला जो स्कूलों में मजबूत और कार्यात्मक सुरक्षात्मक प्रणालियों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

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2021 के सरकारी आदेश में हर स्कूल में छात्र सुरक्षा सलाहकार समिति बनाने का आह्वान किया गया था, जिसमें स्कूल के प्रिंसिपल, दो शिक्षक, दो अभिभावक, एक प्रबंधन प्रतिनिधि, गैर-शिक्षण कर्मचारी और एक बाहरी सदस्य शामिल होना था। प्रिंसिपल एक स्थायी सदस्य होगा, जबकि गतिशीलता और सतर्कता बनाए रखने के लिए समिति के आधे सदस्यों को हर साल बदला जाएगा।

इन समितियों को छात्रों के खिलाफ यौन शोषण की किसी भी घटना की सीधे राज्य स्तरीय केंद्रीय शिकायत केंद्र को रिपोर्ट करने की महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई है, जिसे विशेष रूप से इसी उद्देश्य के लिए स्थापित किया गया था। हालांकि, शबना की जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये समितियाँ ज़्यादातर गैर-कार्यात्मक हैं और नियमित रूप से इनका पुनर्गठन नहीं किया गया है, जिससे उनकी प्रभावशीलता में काफ़ी कमी आई है।

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