सेवानिवृत्त आईएएस की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगायी रोक; COVID से सम्बंधित ट्वीट करने पे हुई है FIR

लखनऊ—-इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। सेवानिवृत्त आईएएस के विरुद्ध उन्नाव जिले के कोतवाली थाने में केस दर्ज है। उनकी अरेस्टिंग पर लगी रोक पुलिस द्वारा जांच पूरी करने के पश्चात दाखिल रिपोर्ट अथवा अग्रिम सुनवाई तक रहेगी । वहीं कोर्ट को उनके वकील ने आश्वासन दिया है कि वह भविष्य में ट्वीट करते वक्त सावधानी बरतेंगे।

उपरोक्त आदेश जस्टिस रमेश सिंह व जस्टिस जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने सूर्य प्रताप सिंह की याचिका पर दिया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने 31 मई 2021 को एक ट्वीट किया था जिससे गंगा में बहते शवों की फोटो थी। उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि याची द्वारा अपने ट्वीट के साथ लगाए गए फोटोग्राफ 13 जनवरी 2014 के थे जिसे उन्होंने हाल का बताकर नफरत फैलाने और तनाव उत्पन्न करने के उद्देश्य से प्रयोग किया।

याचिकाकर्ता को दलील दी गई कि उसे जैसे ही इस बात का अहसास हुआ कि उक्त फोटोग्राफ का दुरुपयोग हो सकता है,उन्होंने तत्काल प्रबजाव से अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है। कहा गया कि याची के विरुद्ध आईपीसी की धारा 153,465, औऱ 505 महामारी अधिनियम की धारा 21 आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 54 व आईटी एक्ट की धारा 67 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई है।

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दलील दी गई कि एफआईआर के किसी भी तथ्य से उक्त धाराओं में केस नही बनता। साथ ही कहा गया कि इसी आरोप में बनारस के लंका थाने में उंसके विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया गया है। याची के पक्षकार अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 30 अप्रैल को की गई टिप्पणी का भी उल्लेख किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मीडिया रिपोर्टिंग करने और अपनी शिकायत सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नही की जा सकती।

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