लगातार 16 घंटे की ड्यूटी के बाद झपकी लेना अपराध नहीं”: कर्नाटक हाई कोर्ट ने निलंबित कांस्टेबल को किया बहाल

कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में परिवहन कांस्टेबल चंद्रशेखर को बहाल करने का आदेश दिया, जिन्हें ड्यूटी के दौरान संक्षिप्त झपकी लेने के कारण निलंबित कर दिया गया था। यह फैसला तब आया जब यह सामने आया कि कांस्टेबल लगातार दो महीने तक डबल शिफ्ट में काम कर रहे थे।

कर्नाटक हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने कल्याण कर्नाटक रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (KKRTC) द्वारा जारी निलंबन आदेश को अनुचित ठहराया। अदालत ने अपने फैसले में चंद्रशेखर की अत्यधिक कार्य स्थितियों पर प्रकाश डाला, जिन्होंने बिना किसी छुट्टी के लगातार 60 दिनों तक प्रतिदिन 16 घंटे की शिफ्ट में काम किया था।

यह मामला तब सार्वजनिक ध्यान में आया जब चंद्रशेखर का झपकी लेते हुए एक वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद KKRTC ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की। निगम ने दलील दी कि इस वीडियो ने उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि असली समस्या यह थी कि कांस्टेबल को अव्यवहारिक रूप से अधिक कार्यभार सौंपा गया था।

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अपने फैसले में, न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने जोर देकर कहा कि पर्याप्त विश्राम का अधिकार भारतीय संविधान और अंतरराष्ट्रीय श्रम कानूनों के तहत संरक्षित है। उन्होंने कहा, “यदि किसी कर्मचारी को कानूनी रूप से स्वीकृत घंटों से अधिक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो थकान स्वाभाविक है।”

2016 से कर्नाटक राज्य परिवहन के कोप्पल में कार्यरत चंद्रशेखर ने अदालत को बताया कि लंबे काम के घंटे के कारण उन्हें गंभीर रूप से नींद की कमी हो गई थी। अदालत ने फैसला सुनाया कि ऐसे कठिन परिस्थितियों में संक्षिप्त झपकी लेने के लिए उन्हें दंडित करना अन्यायपूर्ण है।

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