सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा-झांसी रेलवे विस्तार के लिए पेड़ों की कटाई पर लगी रोक हटाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मथुरा और झांसी के बीच रेलवे लाइन के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई पर लगी अपनी पिछली रोक हटा ली, यह पुष्टि करने के बाद कि रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने अपने पुनर्वनीकरण दायित्वों को पूरा कर लिया है। यह निर्णय केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट के बाद लिया गया, जिसने प्रतिपूरक उपाय के रूप में 50,943 पौधे लगाने की पुष्टि की।

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अक्टूबर में, पर्यावरण संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा न किए जाने की चिंताओं के कारण निर्माण कार्य रुक गया था। कोर्ट ने शुरू में 13 मई, 2022 को 5,094 पेड़ों की कटाई की अनुमति इस शर्त पर दी थी कि आरवीएनएल व्यापक वनीकरण करेगा। इस क्षेत्र में तीसरी रेलवे लाइन जोड़ने के उद्देश्य से बनाई गई इस परियोजना को तब निलंबित कर दिया गया था, जब प्रतिपूरक वनीकरण अधूरा बताया गया था।

आरवीएनएल के वकील ने कार्यवाही के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला कि कोर्ट की मंजूरी के बाद, वनीकरण की आवश्यकता को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश वन विभाग को आवश्यक धनराशि आवंटित की गई थी। हालांकि, इन शर्तों को पूरा करने के बारे में अस्पष्टताएं थीं, जिससे जिम्मेदारी को लेकर विवाद पैदा हो गया।

मामले की देखरेख कर रहे न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति मनमोहन ने स्पष्ट किया कि न्यायालय की शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आरवीएनएल की है। पौधे लगाने की पुष्टि के साथ ही न्यायालय ने परियोजना पर लगी रोक हटा दी और निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।

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