न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि न्यायिक निर्देशों को बाधित करने के लिए जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से की गई कार्रवाई अवमानना के बराबर है, भले ही स्पष्ट निषेधाज्ञा न हो। यह फैसला सेलिर एलएलपी द्वारा उधारकर्ता श्री सुमति प्रसाद
