इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि भरण-पोषण आवेदन को प्रारंभिक स्तर पर इस आधार पर ख़ारिज नहीं किया जा सकता की दूसरी शादी अमान्य है। न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल की पीठ फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश को चुनौती देते हुए दायर आपराधिक पुनरीक्षण पर विचार कर रही थी, जिसके द्वारा संबंधित ट्रायल कोर्ट में पुनरीक्षणकर्ता
