दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी नाबालिग भांजी के साथ ‘एग्रवेटेड पेनेट्रेटिव’ यौन हमले (aggravated penetrative sexual assault) के दोषी एक व्यक्ति की दोषसिद्धि और 20 साल के कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखा है। अपील को खारिज करते हुए, कोर्ट ने चिकित्सा अधिकारियों द्वारा “भ्रूण के ऊतकों” (product of conception) को ‘फॉर्मेलिन’ में सुरक्षित रखने
