पत्नी कोई गुलाम नही जो पति को पीटने का अधिकार मिल गया: बॉम्बे हाई कोर्ट

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपनी पत्नी पर जानलेवा हमला करने वाले पति को दोषी करार देते हुए उसकी सजा को बरकरार रखा है। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा पति के लिए चाय बनाने से मना करना पत्नी को पीटने के लिए उकसाने का कारण स्वीकार नही किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि “पत्नी कोई वस्तु या गुलाम नही”है।

हाई कोर्ट की जस्टिस रेवती मोहिते देरे ने कहा कि “विवाह समानता पर आधारित साझेदारी है”लेकिन समाज मे पितृसत्ता की अवधारणा अब भी कायम है। और अब यह समझा जाता है कि महिला पुरुष की संपत्ति है,जिसकी वजह से पुरुष यह सोचने लगता है कि महिला उसकी गुलाम है। कोर्ट ने कहा कि इस दंपत्ति की 6 वर्षीय बेटी का बयान भरोसा करने लायक है। 

हाई कोर्ट ने वर्ष 2016 को एक स्थानीय अदालत द्वारा संतोष अख्तर को दी गई 10 वर्ष क़ैद की सजा को बरकरार रखा है। अख्तर को गैरइरादतन हत्या का दोषी करार दिया गया है। 

आदेशनुसार दिसंबर वर्ष 2013 में अख्तर की पत्नी उसके लिए चाय बनाए बगैर घर से बाहर जाने की बात कह रही थी। जिसको लेकर दोनों के बीच कहासुनी होने लगी जिसमे गुस्से में आकर अख्तर ने हथोड़े से अपनी पत्नी के सर पर वार किया। और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। 

दंपति की बेटी के बयान के अनुसार अख्तर ने इस घटना को अंजाम देने के बाद घटनास्थल को साफ किया ,अपनी पत्नी को नहलाया उसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया। महिला की अस्पताल में तकरीबन एक सप्ताह बाद मौत हो गई।

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