पत्नी निजी प्रोपर्टी और गुलाम नही है जिसे साथ रहने के लिए विवश किया जाय: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में  फिर से दोहराया है कि पत्नी निजी संपत्ति या गुलाम नही है जिसे साथ रहने के लिए मजबूर किया जाय। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्नी के साथ जोर जबरदस्ती कर पति के साथ रहने के लिए नही कहा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट में एक व्यक्ति ने याचिका दाखिल कर कहा था कि कोर्ट उसकी पत्नी को आदेश दे की वह उसके साथ रहने लगे। 

जस्टिस एसके कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने याची से कहा कि आपको क्या लगता है? क्या महिला किसी की गुलाम है जो हम ऐसा आदेश दें। क्या पत्नी आपकी निजी संपत्ति है जो उसे आपके साथ जाने का निर्देश दिया जाए। 

पति दहेज के लिए उत्पीड़न करता था—- वर्ष 2003 में इनकी शादी हुई थी। लेकिन कुछ दिनों बाद पति दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित करने लगा। जिससे ऊबकर पत्नी पति से अलग रहने लगी। 2015 में उसने भरण पोषण भत्ता के लिए मामला दर्ज किया तो गोरखपुर की कोर्ट ने पति को बीस हजार प्रतिमाह देने का आदेश दिया। 

जिसके बाद पति ने पारिवारिक न्यायालय में याचिका दाखिल की। जिसके बाद पति के हक में फैसला सुनाया गया। जिसके बाबजूद भी पति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से गुहार लगाई  कि जब वह पत्नी को साथ मे रखने के लिए तैयार है तो गुजारा भत्ता कैसा? 

Also Read

जिस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पति की याचिका को खारिज कर दिया। तो उसने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया। पत्नी ने पति पर आरोप लगाया है कि वह यह सब इसलिए कर रहा है कि उसे गुजारा भत्ता न देना पड़े। कोर्ट की सुनवाई के दौरान पति के पक्षकार वकील ने कोर्ट के समक्ष कहा कि पत्नी को पति के पास वापस जाने का आदेश देना चाहिए। क्योंकि फैमिली कोर्ट ने भी पति के समर्थन में फैसला दिया है। 

वकील की तरफ से बार बार पत्नी को पति के वापस जाने के आदेश को लेकर कोर्ट ने कहा कि पत्नी निजी संपत्ति या गुलाम नही जिसे साथ जाने के लिए मजबूर किया जाय? इसी के साथ पीठ ने दाम्पत्य अधिकारों की याचिका रदद कर दी।

Download Law Trend App

Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles