उत्तराखंड हाईकोर्ट ने GGIC रानीपोखरी की प्राचार्या को पद पर बनाए रखने का निर्देश दिया, कहा—दुर्व्यवहार का कोई प्रमाण नहीं

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज (GGIC) रानीपोखरी की प्राचार्या को उनके पद पर बनाए रखने का निर्देश दिया है, यह देखते हुए कि उनके खिलाफ लगे आरोपों का कोई सबूत नहीं मिला।

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ प्राचार्या की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने शिक्षा विभाग की उस सिफारिश को चुनौती दी थी, जिसमें विवाद के चलते उन्हें और कुछ शिक्षकों को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा गया था।

मामला तब शुरू हुआ जब विद्यालय के कुछ शिक्षकों ने प्राचार्या के विरुद्ध शिकायतें दर्ज कराईं और उनके हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया। शिक्षकों का संगठन भी इस विरोध में शामिल हो गया। बढ़ते विवाद को देखते हुए शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यीय समिति गठित की।

समिति ने अपनी जांच में यह पाया कि प्राचार्या के खिलाफ लगे आरोपों को साबित करने वाला कोई भी साक्ष्य मौजूद नहीं है। इसके बावजूद समिति ने प्राचार्या और शिक्षकों—दोनों के तबादले की सिफारिश की और यह प्रस्ताव विभाग के सचिव को भेज दिया।

प्राचार्या ने इस सिफारिश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान माध्यमिक शिक्षा निदेशक मुकुल साती अदालत में उपस्थित हुए।

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रिकॉर्ड देखने के बाद न्यायालय ने माना कि जांच में कोई दुर्व्यवहार साबित नहीं हुआ है और निर्देश दिया कि प्राचार्या को उनके पद पर ही बनाए रखा जाए।

अब विभाग को हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए आगे की प्रशासनिक कार्रवाई करनी होगी।

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