कोटद्वार विवाद: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सभी FIR पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी, ‘मोहम्मद दीपक’ से चंदे का ब्योरा दाखिल करने को कहा

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार में हुए विवादित मामले में दर्ज सभी FIR की जांच प्रगति पर राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है। साथ ही, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद चर्चा में आए जिम संचालक दीपक कुमार उर्फ “मोहम्मद दीपक” को अदालत ने निर्देश दिया है कि वे अपने खाते में प्राप्त चंदे का पूरा विवरण शपथपत्र के रूप में पेश करें।

यह मामला न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ के समक्ष आया, जहां दीपक कुमार ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने, पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

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सुनवाई के दौरान अदालत ने दीपक के उस बयान पर ध्यान दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि घटना का वीडियो वायरल होने के बाद उनके बैंक खाते में ₹100 से ₹500 तक की छोटी-छोटी राशि के रूप में लोगों ने आर्थिक सहयोग भेजा है। इस पर अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि वे कुल प्राप्त राशि का विस्तृत ब्योरा हलफनामे के जरिए पेश करें।

यह पूरा विवाद जनवरी में कोटद्वार में उस समय सामने आया, जब बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद की दुकान के नाम ‘बाबा’ पर आपत्ति जताई। दीपक कुमार ने इस दौरान अहमद का समर्थन किया और नाम बदलने की मांग पर सवाल उठाए। वायरल वीडियो में दीपक यह कहते दिखे कि यह दुकान 30 साल से अधिक पुरानी है। जब भीड़ ने उनकी पहचान पूछी, तो उन्होंने जवाब दिया, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।”

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इस घटना के बाद पुलिस ने तीन अलग-अलग FIR दर्ज कीं। पहली FIR उन 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई, जिन पर सार्वजनिक शांति भंग करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने के आरोप हैं।

दूसरी FIR दुकानदार वकील अहमद की शिकायत पर दर्ज हुई, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर गाली-गलौज और सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया गया।

तीसरी FIR स्थानीय निवासी कमल प्रसाद की शिकायत पर दीपक कुमार और उनके सहयोगी विजय रावत के खिलाफ दर्ज की गई, जिसमें उनके ऊपर बदसलूकी, मोबाइल छीनने और आपराधिक धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं।

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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग पर संदेह व्यक्त किया और कहा कि जांच कानून के अनुसार ही आगे बढ़नी चाहिए।

अदालत ने राज्य सरकार को सभी FIR में हुई कार्रवाई की वर्तमान स्थिति बताने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है।

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