इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वार्षिक स्थानांतरण-2026 के तहत प्रदेश के 266 अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीशों (ADJs) की ‘रेडीनेस लिस्ट’ (Readiness List) जारी कर दी है। हाईकोर्ट के महानिबंधक मंजीत सिंह श्योरन द्वारा 5 अप्रैल 2026 को जारी कार्यालय ज्ञाप के अनुसार, सूची में शामिल सभी न्यायिक अधिकारियों को 15 अप्रैल 2026 की दोपहर तक अपना वर्तमान कार्यभार छोड़कर नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है।
स्थानांतरण को लेकर सख्त निर्देश
न्यायिक अधिकारियों के लिए जारी निर्देश (संख्या 191/Admin (Services)/2026) में स्पष्ट किया गया है कि तबादले की विस्तृत अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी। हाईकोर्ट ने जिला जजों और संबंधित प्रभारियों को सख्त हिदायत दी है कि स्थानांतरण अधिसूचना जारी होने तक तबादले से संबंधित किसी भी आवेदन को आगे न बढ़ाएं।
कार्यालय ज्ञाप में स्पष्ट उल्लेख है:
“नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व स्थानांतरण से संबंधित किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।”
प्रशासनिक और विशेष नियुक्तियों के मुख्य अंश
266 न्यायिक अधिकारियों की इस सूची में कई अधिकारियों को हाईकोर्ट और राज्य सरकार के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं:
- महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव:
- नीतीश कुमार राय (बाराबंकी) को उत्तर प्रदेश शासन के न्याय विभाग में विशेष सचिव एवं अपर एल.आर. के पद पर लखनऊ भेजा गया है।
- धीरेंद्र कुमार-द्वितीय (लखनऊ) को हाईकोर्ट, लखनऊ बेंच में रजिस्ट्रार (न्यायिक) नियुक्त किया गया है।
- वरुण मोहित निगम (बुलंदशहर) और ज्ञान प्रकाश तिवारी द्वितीय (बलिया) को इलाहाबाद हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार (न्यायिक) के पद पर तैनात किया गया है।
- श्रीमती अपर्णा त्रिपाठी प्रथम (रमाबाई नगर) और श्रीमती निशा झा (सीतापुर) को ज्यूडिशियल ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (JTRI), लखनऊ में एडिशनल डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।
- न्यायिक दंपतियों की तैनाती: सूची में कई ऐसे न्यायिक अधिकारियों का नाम शामिल है जिनके जीवनसाथी भी न्यायिक सेवा में हैं। हाईकोर्ट ने प्रशासनिक सुविधा को देखते हुए कई दंपतियों को एक ही जिले या आसपास के स्थानों पर तैनात किया है। उदाहरण के तौर पर, संतोष कुमार यादव और उनकी पत्नी श्रीमती संदीप यादव को आजमगढ़ से बरेली स्थानांतरित किया गया है। इसी तरह विकास नागर और उनकी पत्नी श्रीमती प्रतीक्षा नागर को गौतम बुद्ध नगर से गोरखपुर भेजा गया है।
अभ्यावेदन और भत्ते संबंधी नियम
हाईकोर्ट ने सूचित किया है कि 3 अप्रैल 2026 तक प्राप्त हुए स्थानांतरण स्थगन या समय पूर्व स्थानांतरण के सभी आवेदनों का निस्तारण कर दिया गया है और उनके निर्णयों को इस रेडीनेस लिस्ट में शामिल कर लिया गया है।
अदालत ने यह भी साफ किया है कि जिन अधिकारियों का स्थानांतरण उनके स्वयं के अनुरोध पर सामान्य कार्यकाल पूरा होने से पहले किया गया है, वे यात्रा भत्ता (TA) या दैनिक भत्ता (DA) के हकदार नहीं होंगे।
यह वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया जिला न्यायपालिका के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट की एक नियमित प्रशासनिक कवायद है। इस आदेश की प्रतियां यूपी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जेटीआरआई (JTRI) और प्रदेश के सभी जिला जजों को तत्काल कार्यान्वयन हेतु भेज दी गई हैं।

