एक वर्ष की UGC-मान्यता प्राप्त LLM डिग्री सार्वजनिक और विश्वविद्यालयीय नियुक्तियों के लिए मान्य: मद्रास हाईकोर्ट

एक महत्वपूर्ण और व्यापक प्रभाव वाले निर्णय में, मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि एक वर्ष की LLM डिग्री विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अनुमोदित है, तो वह न केवल पीएच.डी. कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए मान्य है, बल्कि सरकारी और विश्वविद्यालयी नियुक्तियों के लिए भी पूरी तरह वैध है।

यह निर्णय डॉ. संगीता श्रीराम के पक्ष में आया, जिन्हें तमिलनाडु शिक्षक भर्ती बोर्ड (TRB) द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के बावजूद असिस्टेंट प्रोफेसर (मानवाधिकार) के पद पर नियुक्ति से वंचित कर दिया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

डॉ. संगीता श्रीराम ने TRB की अधिसूचना संख्या 2/2018 के तहत मानवाधिकार विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया था। वह GT/GT (महिला) श्रेणी से थीं और उन्होंने 175 में से 133 अंक प्राप्त कर लिखित परीक्षा में टॉप किया। इसके बाद उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, लेकिन 14 मई 2019 को प्रकाशित अस्थायी चयन सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया, जबकि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को चुना गया।

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अधिवक्ता श्री एम. निर्मलकुमार की ओर से प्रतिनिधित्व प्राप्त कर, डॉ. श्रीराम ने रिट याचिका संख्या 15473/2019 के तहत हाईकोर्ट का रुख किया और चयन सूची को रद्द करने तथा अपनी नियुक्ति का आदेश देने की मांग की।

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कानूनी मुद्दे और तर्क

मामले का मुख्य कानूनी मुद्दा यह था कि क्या नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु से प्राप्त एक वर्ष की LLM डिग्री वैध है? राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता श्री वी. उमाकांत ने तर्क दिया कि पात्रता के लिए दो वर्ष की LLM डिग्री आवश्यक थी।

TRB की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री आर. नीलकंठन और स्थायी वकील श्री आर. सिद्धार्थ ने भी यही तर्क रखा। बाद में UGC को भी पक्षकार बनाया गया, जिसकी ओर से श्री पी.आर. गोपीनाथन ने पक्ष रखा।

अदालत की टिप्पणियाँ और निष्कर्ष

न्यायमूर्ति आर.एन. मंजुला ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट रूप से कहा:

“जब एक वर्ष की LLM डिग्री UGC द्वारा मान्यता प्राप्त है और उसे पीएच.डी. में प्रवेश के लिए स्वीकार किया जाता है, तो मैं उसे नियुक्ति के लिए अस्वीकार करने का कोई कारण नहीं देखती।”

अदालत ने यह भी पाया कि TRB की अधिसूचना में दो वर्ष की डिग्री की कोई स्पष्ट अनिवार्यता नहीं थी। उसमें केवल इतना लिखा था कि उम्मीदवार को किसी भारतीय या मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में 55% अंक प्राप्त होने चाहिए।

न्यायमूर्ति मंजुला ने यह भी कहा:

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“नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता में समान और समकक्ष पाठ्यक्रमों के बीच किसी प्रकार का मनमाना भेदभाव नहीं होना चाहिए।”

उन्होंने यह भी जोड़ा:

“जहाँ तक प्रश्नकर्ता ने अपनी LLM की पढ़ाई जिस विश्वविद्यालय से की है — वह देश के सबसे प्रतिष्ठित विधि संस्थानों में से एक है — इस पर कोई संदेह नहीं।”

इस संदर्भ में अदालत ने दो पूर्व निर्णयों का हवाला दिया:

  • Suganya Jeba Sarojini बनाम Tamil Nadu Dr. Ambedkar Law University (2024 SCC OnLine Mad 367)
  • K. Parandhaman बनाम TNPSC (2024 SCC OnLine Mad 2210)
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अदालत का निर्णय

मद्रास हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए 14 मई 2019 की TRB चयन सूची को रद्द कर दिया और आदेश दिया कि:

  • डॉ. संगीता श्रीराम का नाम चयन सूची में शामिल किया जाए,
  • राज्य सरकार उन्हें पूर्व प्रभाव से नियुक्ति आदेश जारी करे,
  • उन्हें उसी तिथि से प्रतीकात्मक (notional) वरिष्ठता प्रदान की जाए जिस तिथि को उनसे कम अंक पाने वालों की नियुक्ति हुई थी,
  • वास्तविक नियुक्ति की तिथि से सभी वेतन और सेवा लाभ दिए जाएं,
  • निर्णय की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर नियुक्ति आदेश जारी कर दिया जाए।

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