त्रिपुरा डीएम विवाह समारोह रेड मामला- हाईकोर्ट ने पूंछा- किसके निर्देश पर महिलाओं और बच्चों को पुलिस स्टेशन लाया गया था?

बुधवार को, त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने अगरतला (त्रिपुरा) में हुई एक घटना के संबंध में जनहित याचिका पर सुनवाई की, जहां जिला मजिस्ट्रेट शैलेश यादव ने एक मैरिज पार्टी पर छापा मारा और वहां मौजूद सभी लोगों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया।

इससे पहले कोर्ट ने एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इस प्रकार गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंप दी है।

मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति एसजी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने समिति की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद पाया कि समिति इस नतीजे पर पहुंची है कि घटना की रात 13 महिलाओं और 6 बच्चों को शादी से थाने ले जाया गया और उन्हें अगली सुबह रिहा कर दिया गया।

कोर्ट ने यह भी देखा कि जिन महिलाओं और बच्चों को पुलिस स्टेशन लाया गया था, उन्हें अपने घर लौटने के लिए अपने परिवहन की व्यवस्था खुद करनी पड़ी। आगे रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को पुलिस थानों में ले जाना और उन्हें लगभग 2 घंटे तक हिरासत में रखना पूरी तरह से अनावश्यक, अन्यायपूर्ण और अनुचित था। 

बेंच ने कहा कि यह निस्संदेह एक बहुत ही गंभीर मामला है। हालांकि, समिति की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि किसके आदेश के तहत महिलाओं और बच्चों सहित अन्य सदस्यों को हिरासत में लिया गया था। 

ऐसे में कोर्ट ने  निर्देश दिया है कि जांच समिति को मामले के इस पहलू की और जांच कर अगली सुनवाई यानी 22 जून को कोर्ट के समक्ष सीलबंद लिफाफे में अपनी अतिरिक्त रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

इससे पहले उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से त्रिपुरा के पश्चिम डीएम को अगरतला से स्थानांतरित किया गया था, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके. आखिरी तारीख को कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा था कि पिता की शिकायत की क्या स्थिति है और उसे एफआईआर के रूप में क्यों दर्ज नहीं किया गया है।

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