महाराष्ट्र के ठाणे जिले की मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने 2018 में सड़क दुर्घटना में मारे गए 44 वर्षीय व्यक्ति के परिवार को 30.34 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
एमएसीटी सदस्य आर. वी. मोहिटे ने अपने 22 अगस्त के आदेश (जिसकी प्रति गुरुवार को उपलब्ध कराई गई) में कार मालिक जयंत देविदास नारकर और बीमाकर्ता टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को संयुक्त रूप से मुआवजा देने का जिम्मेदार ठहराया।
मामले के अनुसार, 17 नवंबर 2018 को मृतक श्रीराम मदन पाटोले मुंबई–नासिक हाईवे पर किन्हवली फाटा पुल के पास वाहन की प्रतीक्षा कर रहे थे। तभी तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर सड़क से उतर गई और पाटोले समेत कई लोगों को टक्कर मार दी। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी।

अदालत ने कहा कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई, जिसने वाहन पर नियंत्रण खो दिया और सर्विस रोड पर खड़े लोगों को टक्कर मारने के बाद गाड़ी नाले में गिर गई।
कार मालिक अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके कारण मामला उनके खिलाफ एकतरफा (ex parte) निपटाया गया। बीमा कंपनी ने यह दावा किया कि वाहन चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था और यह पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। हालांकि, न्यायाधिकरण ने इस दलील को खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा, “बीमा कंपनी यह साबित करने में असफल रही कि दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।”
न्यायाधिकरण ने मृतक की पत्नी और नाबालिग बच्चों को 30.34 लाख रुपये का मुआवजा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित, याचिका दायर किए जाने की तिथि से भुगतान करने का निर्देश दिया।