दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस और मृतक सागर धनखड़ के परिजनों को नोटिस जारी करते हुए उनका पक्ष मांगा। अदालत ने पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट और शिकायतकर्ता पक्ष को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनुप जे. भंभानी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले जमानत रद्द किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा,
“मुझे लगता है कि आप बहुत महत्वाकांक्षी हो रहे हैं। जब सुप्रीम कोर्ट एक राय ले चुका है, तो आप मुझसे क्या अपेक्षा रखते हैं?”
आरोपी की ओर से दलील दी गई कि ट्रायल में सभी पब्लिक गवाहों की जांच हो चुकी है, इसलिए जमानत याचिका पर विचार किया जाना चाहिए।
वहीं दिल्ली पुलिस और मृतक के परिजनों की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि अभी सभी पब्लिक गवाहों की जांच पूरी नहीं हुई है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्टेटस रिपोर्ट और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुशील कुमार को मई 2021 में पूर्व जूनियर राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियन सागर धनखड़ की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
अभियोजन के अनुसार, धनखड़ का अपहरण कर उसे छत्रसाल स्टेडियम लाया गया, जहां कई आरोपियों ने बेसबॉल और हॉकी स्टिक से उसकी बेरहमी से पिटाई की।
अक्टूबर 2022 में ट्रायल कोर्ट ने सुशील कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा हत्या, आपराधिक साजिश, आपराधिक धमकी और घातक हथियार के साथ दंगा करने सहित आर्म्स एक्ट के तहत आरोप तय किए थे।
जुलाई 2023 में सत्र अदालत ने घुटने की सर्जरी के लिए सुशील कुमार को एक सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी।
बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा था कि गवाहों पर उनके “प्रभाव” और ट्रायल में देरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसके बाद 6 फरवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि आरोपी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट अब दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता पक्ष के जवाब के बाद जमानत याचिका पर आगे विचार करेगा।

