तटरक्षक बल की रिटायरमेंट उम्र पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, सेवा शर्तों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय तटरक्षक बल में सभी रैंकों के लिए 60 वर्ष की समान सेवानिवृत्ति आयु लागू करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है और केंद्र सरकार को सेवा शर्तों व भर्ती से लेकर रिटायरमेंट तक के ढांचे की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र की अपील पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के अमल पर रोक लगा दी, जिसमें तटरक्षक बल के अधिकारियों के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति आयु तय करने वाले 1986 के नियमों को असंवैधानिक ठहराया गया था।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि तटरक्षक बल जैसे अत्यधिक कुशल और तकनीकी रूप से उन्नत बल में अनुभव की अहम भूमिका होती है और सेवा शर्तों को पुराने ढांचे के आधार पर नहीं छोड़ा जा सकता। अदालत ने संकेत दिया कि सरकार को इस विषय पर स्थिर और रूढ़िवादी दृष्टिकोण से आगे बढ़कर व्यापक समीक्षा करनी चाहिए।

कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह तटरक्षक कर्मियों की सेवा शर्तों—विशेष रूप से भर्ती की आयु से लेकर सेवानिवृत्ति तक—का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाए और उसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करे। साथ ही केंद्र को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा गया है और मामले की अगली सुनवाई भी दो सप्ताह बाद तय की गई है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने तटरक्षक बल की तुलना ITBP, CRPF, CISF और SSB जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से करके गलती की। उन्होंने कहा कि समुद्र में काम करने की परिस्थितियां कहीं अधिक कठोर होती हैं और नौसेना की तरह कम उम्र का कार्यबल बनाए रखना आवश्यक होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सशस्त्र बलों में सेवानिवृत्ति आयु भर्ती की आयु और सेवा अवधि के संतुलन से तय की जाती है और यह पूरी तरह नीति का विषय है। यदि हाईकोर्ट का आदेश लागू रहा तो अन्य रक्षा सेवाओं में भी समान मांगें उठ सकती हैं।

24 नवंबर को दिए गए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा था कि कमांडेंट और उससे नीचे के अधिकारियों की रिटायरमेंट आयु 57 वर्ष और उससे ऊपर के अधिकारियों की 60 वर्ष रखना तर्कसंगत आधार के बिना भेदभावपूर्ण है। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन बताते हुए 1986 के नियमों की संबंधित धाराओं को असंवैधानिक घोषित कर दिया था और सभी रैंकों के लिए 60 वर्ष की समान सेवानिवृत्ति आयु लागू करने का निर्देश दिया था।

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यह फैसला उन याचिकाओं पर आया था जो उन अधिकारियों ने दायर की थीं जिन्हें नियमों के अनुसार 57 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होना पड़ा था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और विस्तृत सुनवाई के बाद होगा। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक जारी रहेगी और तटरक्षक बल की रिटायरमेंट नीति पर पुनर्विचार की प्रक्रिया शुरू होगी।

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