सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण आदेश में हजारों परेशान फ्लैट खरीदारों को राहत देते हुए नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) को सुपरटेक लिमिटेड की 16 अधूरी हाउसिंग परियोजनाओं को पूरा करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने एनसीएलएटी के 12 दिसंबर 2024 के आदेश को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत “पूर्ण न्याय” के लिए बरकरार रखते हुए यह फैसला सुनाया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि NBCC के निर्माण कार्य में किसी प्रकार का विघ्न न आए, इसके लिए देशभर की सभी अदालतों और न्यायाधिकरणों को इस संबंध में कोई आदेश पारित करने से रोक दिया गया है।
सुपरटेक द्वारा 2010–12 के बीच करीब 51,000 घर बुक किए गए थे, लेकिन एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बड़ी संख्या में परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। कोर्ट ने कहा कि घरों की डिलीवरी के बिना वित्तीय और परिचालन ऋणदाताओं की मांगों पर विचार नहीं किया जा सकता।
“वास्तविक खरीदारों को पूर्ण सुविधाओं से युक्त घर सौंपने के बाद ही वित्तीय व अन्य देनदारों की देनदारियों पर विचार किया जाएगा।”
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि घरों में पानी, बिजली, सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए और आसपास सड़कें, पार्क आदि भी सुनिश्चित किए जाएं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुपरटेक के ऋणदाताओं—चाहे वे वित्तीय हों या परिचालन से संबंधित—को वह ‘हेयरकट’ स्वीकार करना होगा, जिसे एनसीएलटी और एनसीएलएटी न्यायोचित और उचित मानें।
“NBCC को प्रोजेक्ट्स पूरा करने के लिए एनसीएलएटी द्वारा रिकॉर्ड पर लाने का आदेश न तो अनुचित है और न ही IBC के प्रावधानों के विपरीत,” कोर्ट ने कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए कहा कि खरीदारों को न्याय दिलाने के लिए यह हस्तक्षेप आवश्यक था। इस अनुच्छेद के तहत कोर्ट किसी भी मामले में पूर्ण न्याय के लिए आवश्यक आदेश पारित कर सकता है।
कोर्ट ने NBCC को एनसीएलएटी द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के सहयोग से सभी 16 प्रोजेक्ट्स को शीघ्रता से पूरा करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने दो टूक कहा कि देश की कोई भी अदालत या ट्रिब्यूनल ऐसा कोई आदेश पारित न करे जिससे NBCC द्वारा जारी निर्माण कार्य बाधित हो।
गौरतलब है कि 21 फरवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने NBCC की परियोजना प्रबंधन सलाहकार नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। यह काम लगभग ₹9,500 करोड़ की लागत से किया जाना था। अब इस रोक को हटाते हुए कोर्ट ने NBCC को पूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी है।
कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं का निस्तारण कर दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यदि आगे किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो संबंधित पक्ष पुनः सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

