चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ उद्धव ठाकरे गुट की याचिका पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट राजी

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को उद्धव ठाकरे गुट की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता देने और उसे “धनुष और तीर” चुनाव चिन्ह आवंटित करने का आदेश दिया गया था।

ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया।

सिब्बल ने कहा, “अगर चुनाव आयोग के आदेश पर रोक नहीं लगाई जाती है तो वे चुनाव चिह्न और बैंक खातों को अपने कब्जे में ले लेंगे। कृपया इसे कल संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें।”

शीर्ष अदालत ने कहा कि उसे मामले की फाइलों को देखने की जरूरत है और मामले को बुधवार दोपहर साढ़े तीन बजे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी और उसे “धनुष और तीर” चुनाव चिन्ह आवंटित करने का आदेश दिया था।
संगठन के नियंत्रण के लिए लंबी लड़ाई पर 78 पन्नों के आदेश में, आयोग ने उद्धव ठाकरे गुट को राज्य में विधानसभा उपचुनाव पूरा होने तक “धधकती मशाल” चुनाव चिह्न रखने की अनुमति दी।

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आयोग ने कहा कि शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों को 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में शिवसेना के 55 विजयी उम्मीदवारों के पक्ष में लगभग 76 प्रतिशत वोट मिले।
तीन सदस्यीय आयोग ने कहा कि उद्धव ठाकरे गुट के विधायकों को विजयी शिवसेना उम्मीदवारों के पक्ष में 23.5 प्रतिशत वोट मिले।

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