सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व आईआरएस (IRS) अधिकारी के साथ हुए अन्याय को “विभागीय प्रतिशोध की घिनौनी कहानी” (Sordid tale of targeted departmental vendetta) करार देते हुए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी को दुर्भावनापूर्ण तरीके से निशाना बनाया गया और लंबी कानूनी लड़ाई में उलझाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) में सदस्य (लेखा) के पद के लिए हुई चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया है, क्योंकि चयन समिति में एक ऐसे अधिकारी को शामिल किया गया था, जिनके खिलाफ याचिकाकर्ता ने पहले अवमानना का मुकदमा दायर किया था।
क्या है पूरा मामला?
यह कहानी एक पूर्व सैन्य अधिकारी और आईआरएस अधिकारी कैप्टन प्रमोद कुमार बजाज के संघर्ष की है। कैप्टन बजाज ने भारतीय सेना में अपनी सेवा दी थी, लेकिन एक ऑपरेशन के दौरान शारीरिक अक्षमता (Disability) के कारण उन्हें सेना से कार्यमुक्त कर दिया गया। हार न मानते हुए, उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और 1990 में भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में शामिल हुए। उनका करियर बेदाग रहा और 2012 में वे आयकर आयुक्त (Commissioner of Income Tax) के पद पर पदोन्नत हुए।
विवाद की शुरुआत 2014 में हुई जब कैप्टन बजाज ने ITAT में सदस्य (लेखा) के पद के लिए आवेदन किया। उस समय जस्टिस टी.एस. ठाकुर (तत्कालीन) की अध्यक्षता वाली सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी (SCSC) ने उन्हें ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट में पहला स्थान दिया। लेकिन विभाग ने एक पुराने और सुलझ चुके वैवाहिक विवाद का हवाला देते हुए उनकी नियुक्ति रोक दी।
इसके बाद कानूनी लड़ाई का एक लंबा दौर चला। कैप्टन बजाज ने ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट में जीत हासिल की, लेकिन विभाग ने उन्हें नियुक्ति देने के बजाय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर दी और 2019 में उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक पहले उन्हें जबरन रिटायर (Compulsorily Retired) कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 3 मार्च 2023 के अपने फैसले में इस जबरन रिटायरमेंट को रद्द कर दिया था और इसे “दंडात्मक कार्रवाई” बताया था।
ताज़ा विवाद: चयन समिति में “पूर्वाग्रह”
सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले के बावजूद, कैप्टन बजाज को ITAT में नियुक्ति नहीं मिली। उन्हें 1 सितंबर 2024 को पुनर्गठित SCSC के सामने फिर से साक्षात्कार के लिए बुलाया गया।
जब कैप्टन बजाज कमेटी के सामने पहुंचे, तो वे यह देखकर हैरान रह गए कि पैनल में वही “अधिकारी” शामिल थे, जिनके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर की थी और जिन्होंने कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगी थी। नवंबर 2025 में, इस कमेटी ने कैप्टन बजाज की उम्मीदवारी को खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में दलीलें
कैप्टन बजाज ने कोर्ट में स्वयं पैरवी करते हुए तर्क दिया कि जिस अधिकारी के खिलाफ उन्होंने अवमानना का केस चलाया हो, उनका चयन समिति में होना “निष्पक्षता” के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि उस अधिकारी के मन में उनके प्रति द्वेष (Animus) और पूर्वाग्रह (Bias) होना स्वाभाविक है, और इसी कारण उन्हें जानबूझकर रिजेक्ट किया गया।
हैरानी की बात यह रही कि कोर्ट के नोटिस के बावजूद केंद्र सरकार (Union of India) की तरफ से न तो कोई जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) दाखिल किया गया और न ही सुनवाई के दौरान कोई वकील पेश हुआ।
कोर्ट का फैसला: “न्याय केवल होना नहीं चाहिए, होते हुए दिखना भी चाहिए”
जस्टिस संदीप मेहता ने फैसला लिखते हुए कहा कि यह मामला प्रतिशोध और उत्पीड़न का एक स्पष्ट उदाहरण है। कोर्ट ने कहा कि जिस अधिकारी ने पहले अवमानना की कार्यवाही का सामना किया हो, उसका चयन समिति में बैठना “प्राकृतिक न्याय” (Natural Justice) के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा:
“हमें लगता है कि SCSC के सदस्य के रूप में ‘उक्त अधिकारी’ को शामिल करने से… निस्संदेह याचिकाकर्ता के मन में पक्षपात की वास्तविक धारणा पैदा हुई है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन था… निष्पक्षता के हित में, उस अधिकारी को खुद ही मूल्यांकन प्रक्रिया से अलग (Recuse) हो जाना चाहिए था।”
कोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों ने जानबूझकर मामले को लटकाया (Rank Procrastination) ताकि कैप्टन बजाज की उम्र निकल जाए और वे पद के लिए अयोग्य हो जाएं।
कोर्ट के निर्देश:
- चयन प्रक्रिया रद्द: 1 सितंबर 2024 को हुई SCSC की बैठक और कैप्टन बजाज को रिजेक्ट करने वाले निर्णय को रद्द कर दिया गया है।
- नई कमेटी का गठन: कोर्ट ने DoPT को निर्देश दिया है कि 4 सप्ताह के भीतर एक नई SCSC की बैठक बुलाई जाए।
- अधिकारी को बाहर रखें: कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि नई कमेटी में उस “दागी अधिकारी” को शामिल न किया जाए।
- जुर्माना: कोर्ट ने केंद्र सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसे 4 सप्ताह के भीतर जमा करना होगा और यह राशि मुआवजे के तौर पर कैप्टन बजाज को दी जाएगी।
केस डीटेल्स:
- केस का नाम: कैप्टन प्रमोद कुमार बजाज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य
- केस नंबर: रिट याचिका (सिविल) संख्या 1180/2025
- कोरम: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता

