सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) को गोरगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) परियोजना के लिए और अधिक पेड़ों की कटाई की अनुमति दे दी, बशर्ते की “प्रतिपूरक वनीकरण” (compensatory afforestation) पूरी निष्ठा से किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया शामिल थे, ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव द्वारा दायर हलफनामे का संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया है कि प्रतिपूरक वनीकरण को एक सरकारी संकल्प (government resolution) का हिस्सा बना दिया गया है। पीठ ने निर्देश दिया, “हलफनामे में किए गए बयानों को पूरी सख्ती से लागू किया जाए।”
इससे पहले 29 जुलाई को शीर्ष अदालत ने फिल्म सिटी, मुंबई में 95 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी थी। लेकिन 27 अक्टूबर को अदालत ने मुंबई में प्रतिपूरक वनीकरण की कमजोर स्थिति पर नाराजगी जताई थी और महाराष्ट्र सरकार को चेताया था कि यदि वनीकरण कार्य ईमानदारी से नहीं हुआ तो मुंबई मेट्रो और GMLR जैसी परियोजनाओं के लिए दी गई सभी पूर्व स्वीकृतियाँ रद्द कर दी जाएंगी।
इसके बाद अदालत ने मुख्य सचिव को सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक करने और यह बताने का निर्देश दिया था कि प्रतिपूरक वनीकरण को वास्तविक रूप से कैसे लागू किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि प्रतिपूरक वनीकरण में कोई अधिकारी लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने अधिकारियों को संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (Sanjay Gandhi National Park) में प्रस्तावित वनीकरण स्थलों का निरीक्षण करने का आदेश भी दिया।
पीठ ने कहा कि कुछ मामलों में पेड़ों की कटाई से पहले भी प्रतिपूरक वनीकरण की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
कोर्ट ने यह निर्देश सिर्फ GMLR तक सीमित नहीं रखा, बल्कि BMC और अन्य एजेंसियों को मेट्रो सहित अन्य परियोजनाओं के लिए भी समान रूप से वनीकरण प्रक्रिया को गंभीरता से लागू करने को कहा। साथ ही 12 सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया।
BMC ने यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के 10 जनवरी के आदेश के संदर्भ में दाखिल की थी, जिसमें कोर्ट ने मुंबई की आरे कॉलोनी में बिना अनुमति किसी भी पेड़ की कटाई पर रोक लगा दी थी। यह आदेश मुंबई मेट्रो रेल कार शेड परियोजना से जुड़ा था।
कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या आरे जंगल में और पेड़ काटने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में कुछ वनवासी समुदायों को आरे में पेड़ कटाई के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में जाने की अनुमति दी थी।
GMLR परियोजना मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी एक्सप्रेस हाईवे को जोड़ने के लिए बनाई जा रही है, जिससे गोरगांव से मुलुंड तक की यात्रा का समय लगभग एक घंटे तक कम होने की संभावना है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने परियोजना के लिए पेड़ काटने की अनुमति दी है, लेकिन उसने यह भी सुनिश्चित किया है कि पर्यावरण संतुलन को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और वनीकरण कार्य न्यायिक निगरानी में रहेगा।

